विश्व जनसंख्या दिवस: 10 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश, 2030 तक 8.5 बिलियन पहुंच जाएगी दुनिया की आबादी

भारत इस वक्त दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है. चीन को पछाड़कर भारत कब-का आगे निकल चुका है. देश की आबादी 1.44  करोड़ पहुंच गई है. दुनिया की आबादी की बात करें तो वो 8 बिलियन तक पहुंच चुकी है. जिस तरह से दुनियाभर में जनसंख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से आने वाले छह साल यानी 2030 में दुनिया की आबादी 8.5 बिलियन को पार कर जाएगी. इस वक्त दुनियाभर में जनसंख्या को नियंत्रण करना बड़ा सवाल बन चुका है. भारत के लिए भी अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण करना जरूरी है.

साल 1989 में जब दुनिया की आबादी 5 अरब के पार पहुंच गई थी उसके बाद 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस माने की शुरुआत हुई. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया की आबादी 9.7 बिलियन को पार कर जाएगी और 2100 तक यह 10.9 बिलियन पहुंच जाएगी. दुनियाभर की बढ़ती हुई जनसंख्या को देखकर ही 1989 में पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया. इसे मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने की. इस दिवस को इसलिए मनाया जाता है ताकि हम बढ़ती हुई जनसंख्या की चुनौतियों और अवसरों पर ध्यान दें और इसके लिए उपाय करें. इस साल विश्व जनसंख्या दिवस की थीम भी है कि किसी को पीछे न छोड़े और सबकी गिनती करें.

दुनिया के 10 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देशों में पाकिस्तान भी शामिल

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान क्षेत्रफल में काफी छोटा है, लेकिन जनसंख्या विस्फोट के मामले में काफी आगे हैं.  144 करोड़ आबादी के साथ दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश भारत है और उसके बाद दूसरे नंबर पर चीन है. चीन की आबादी 142 करोड़ से ज्यादा है. चीन के बाद अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजेरिया, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और मैक्सिको दुनिया के टॉप 10 आबादी वाले देश हैं.

किस देश की कितनी आबादी

  1. भारत- 1,442,114,258
  2. चीन- 1,425,164,017
  3. अमेरिका- 341,869,076
  4. इंडोनेशिया- 279,866,215
  5. पाकिस्तान- 245,352,888
  6. नाइजीरिया- 229,314,518
  7. ब्राजील- 217,673,828
  8. बंग्लादेश- 174,753,862
  9. रूस- 143,942,494
  10. मैक्सिको- 129,416,544
भारत में जनसंख्या को लेकर शुरु हो गई है नई बहस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइजर के ताजा संपादकीय ने देश में जनसंख्या बढ़ोतरी को लेकर नई बहस छेड़ दी है.  पत्रिका के संपादकीय में देश के कुछ इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ जनसांख्यिकीय असंतुलन बढ़ने का दावा करते हुए चिंता जताई गई है. लेख में देश में व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति की आवश्यकता को बताया गया है. लेख में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों में मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी हुई है. कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्ययन में बताया गया था कि 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी में लगभग 8 फीसदी की गिरावट आई है. जबकि इसी अवधि में मुसलमानों की आबादी में रिकॉर्ड 43 फीसदी की वृद्धि हुई है. 1950 में हिंदुओं की आबादी में हिस्सेदारी 84 फीसदी थी लेकिन 2015 में यह घटकर 78 फीसदी रह गई.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *