मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन बच्चों के लिए बन सकती है स्वास्थ्य समस्याओं का कारण..

मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन को बच्चों  के लिए काफी हानिकारक माना गया है. इसके कारण उनमें कई समस्याएं होने का खतरा रहता है जिसमें तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी शामिल हैं. इसके चलते उनके बोलने, सांस लेने, निगलने और सीखने की क्षमता में कमी देखी जा सकती है. इसके अलावा एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन बच्‍चों में कैंसर का कारण बन सकता हैं. यह ब्रेन ट्यूमर की भी वजह बन रहा है.

मॉमजंक्‍शन के मुताबिक, बच्चों में मोबाइल के अधिक उपयोग से डिप्रेशन और जल्द गुस्सा आने की समस्या भी पनप सकती है. इसके अलावा अनिंद्रा भी इसकी एक वजह है. लेकिन महामारी के इस दौर में बच्‍चों के पास मोबाइल एक मजबूरी भी हो चुकी है. ऐसे में पेरेंट्स उन्‍हें कुछ घंटों के लिए मोबाइल की परमिशन दे सकते हैं लेकिन इसकी लत से बचाना जरूरी है|

नींद कम आना

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो महिलाएं बच्चों को सुलाते समय, खाना खिलाते वक्त या फिर बच्चों के साथ कोई एक्टिविटी करते वक्त मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं तो यह बच्चों के ब्रेन को प्रभावित कर सकता है। दरअसल, मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन ब्रेन को प्रभावित करती है, जिसकी वजह से बच्चों की नींद प्रभावित होती है। ऐसे में कई बार बच्चों क कम नींद आना या नींद में बार-बार उठने जैसी बीमारियां हो सकती है। जाहिर सी बात है जब बच्चे को नींद कम आएगी तो उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाएगा।

डाइजेशन पर बुरा प्रभाव

कुछ महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग करवाते वक्त मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं। जिसकी वजह से उनका ध्यान मोबाइल पर ज्यादा और बच्चे पर कम होता है। कई बार ब्रेस्टफीडिंग करवाने के बाद मोबाइल के चक्कर में महिलाएं बच्चों को डकार नहीं दिलाती हैं, जिससे शिशु के डाइजेशन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि डाइजेशन यानि की गट हेल्थ कमजोर होने की वजह से पेट में दर्द, कब्ज और कई तरह की समस्याएं होती हैं।

मोबाइल रेडिएशन बच्चों को हाइपरएक्टिव बना देती है, जो मानसिक और भावनात्मक असर डालती है। अगर आपका बच्चा छोटी सी बात से परेशान, फ्रस्ट्रेट, गुस्सा और दुखी हो जाता है यह हाइपरएक्टिव का संकेत हैं। ऐसे बच्चे दूसरों की बात कम ही सुनते हैं, बहुत ज्यादा बोलते हैं और दूसरों की बातों को काटते रहते हैं।

स्किन पर रैशेज होना

जिस तरह से मोबाइल का इस्तेमाल करने से वयस्कों की स्किन पर रैशेज होते हैं। ठीक वैसे ही यह बच्चों की त्वचा को भी प्रभावित करता है। मोबाइल का रेडिएशन बच्चों की कोमल त्वचा को डैमेज कर सकता है। इसकी वजह से स्किन पर रैशेज, खुजली और जलन की समस्या हो सकती है।

ड्राई आई की समस्या

 बच्चों का स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना आंखों में सूखे पन का कारण बन सकता है. कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लगने लग जाता है, उनकी आंखों का नंबर बढ़. जाता है इतना नहीं कई बार इस से सिरदर्द जैसी समस्या और माइग्रेन जैसी परेशानी हो सकती है.

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