छत्तीसगढ़ में बरसात शुरू होते ही बाजारों में खेखसी की मांग बढ़ गई है। यह मौसमी और बेहद पौष्टिक सब्जी राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
खेखसी खास तौर पर बारिश के दिनों में ही मिलती है और यह घने व कंटीले पौधों वाले क्षेत्रों में उगती है। सालभर में यह सब्जी सिर्फ एक या दो महीने के लिए ही बाजारों में दिखाई देती है। पौष्टिकता और सीमित उपलब्धता के कारण इसकी कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
पोषक तत्वों का खजाना
खेखसी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और जिंक पाया जाता है। प्रारंभिक शोधों से यह भी सामने आया है कि इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, कार्बोहाइड्रेट, कॉपर और पोटैशियम जैसे तत्व भी मौजूद होते हैं। ये सभी तत्व शरीर को पोषण देने और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
इन बीमारियों में मिल सकता है लाभ
खेखसी केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि एक औषधीय खजाना भी है। इसमें मौजूद खनिज और गुणकारी तत्व निम्न रोगों में फायदेमंद माने जाते हैं:
ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम में उपयोगी
सर्पदंश के दुष्प्रभावों को कम करने में मददगार
लकवा, पीलिया, बवासीर, बेहोशी, बुखार, पेट संक्रमण में लाभदायक
सिरदर्द, कान दर्द, खांसी, और त्वचा की खुजली में राहत पहुंचाने वाला
खेखसी: कम समय के लिए मिलने वाली, पर सेहत के लिए बेहद खास
सीमित समय तक उपलब्ध रहने वाली इस मौसमी सब्जी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इसके लाभों को देखते हुए, इसकी कीमत इसके पोषण के सामने मामूली लगती है।









