
जिला जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़):
जिला जांजगीर चांपा के चाम्पा नगर स्थित बरपाली चौक, चाम्पा में रविवार की दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें एक स्कूटी सवार महिला और युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना गुप्ता होटल के पास हुई जब एक शराब के नशे में धुत युवक, जिसका नाम शिवम् गौरहा पिता प्रफुल्ल गौरहा का पुत्र बताया जा रहा है, जो निवासी तिलक नगर ने तेज रफ्तार से स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी।
इस टक्कर से स्कूटी पर सवार महिला को सिर पैर और दाहिने हाथ पर गंभीर चोट आई, वहीं युवक को भी हाथ और पैर में चोटें लगीं। घटना के तुरंत बाद मौके पर भीड़ तो जुटी, लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया।
ऐसे कठिन समय में वहीं से गुजर रहे स्थानीय पत्रकार राजेंद्र प्रसाद जायसवाल और पवन कुमार नामदेव ने मानवीयता का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। उन्होंने बिना किसी देरी के घायलों को संभाला और जनाक्रोश को समझाबुझा कर अपने निजी वाहन से उन्हें नायक मेटरनिटी एवं सर्जिकल सेंटर नर्सिंग होम तक पहुँचाया। अस्पताल में दोनों का तत्काल इलाज शुरू हुआ—महिला का सिर का सिटी स्कैन और हाथ , पैर का एक्स-रे कराया गया, वहीं युवक के भी हाथ और पैर की जाँच कराई गई। डॉक्टर नायक के नेतृत्व में दोनों का इलाज जारी है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब इन पत्रकारों ने इस प्रकार का साहसिक कदम उठाया हो। जून 2023 में भी इन्होंने एक बड़े सड़क हादसे में घायलों की जान बचाई थी। कोरबा से आ रहे दो युवक—लोचन बरेठ और रामाधार बरेठ—चाम्पा-कोरबा रोड स्थित फरसेवानी नेशनल हाईवे क्रमांक 149 B के पास सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। हादसा इतना भयानक था कि चारों ओर अफरातफरी मच गई, परंतु मदद के लिए कोई नहीं रुका।
उस समय भी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल और पवन कुमार नामदेव ने बिना देर किए अपनी गाड़ी रोकी, स्थानीय लोगों की सहायता से चार पहिया वाहन की व्यवस्था की और घायलों को स्व. बिसाहूदास महंत हॉस्पिटल चाम्पा पहुँचाया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बिलासपुर के लाइव केयर हॉस्पिटल रेफर किया गया।
इन दोनों पत्रकारों की संवेदनशीलता और तत्परता ने कई बार यह सिद्ध किया है कि मानवता आज भी ज़िंदा है। समाज में जब लोग केवल मूकदर्शक बन जाते हैं, तब ये लोग आगे बढ़कर अपने कर्तव्यों से ऊपर उठकर इंसानियत निभाते हैं।
स्थानीय समाज और नागरिक इन दोनों पत्रकारों की निस्वार्थ सेवा और मदद की भावना की सराहना कर रहे हैं। आज जब अक्सर यह कहा जाता है कि पत्रकारिता केवल टीआरपी और सनसनी की ओर दौड़ रही है, ऐसे में राजेंद्र प्रसाद जायसवाल और पवन कुमार नामदेव जैसे पत्रकारों की निष्ठा और मानवता निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणा है।
समाज को इनसे सीख लेनी चाहिए कि किसी जरूरतमंद की मदद के लिए न कोई पहचान जरूरी होती है, न कोई पुरस्कार—बल्कि सिर्फ एक संवेदनशील दिल और साहसिक सोच।









