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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : जंगल का राजा बचाओ, प्रकृति को बचाओ

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हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य बाघों की घटती संख्या को लेकर जागरूकता फैलाना और इनके संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना है। बाघ न केवल पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे हमारी जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा भी हैं।

बाघ दिवस का इतिहास:
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट में हुई थी, जहां 13 बाघ रक्षित देशों ने बाघों की संख्या को दोगुना करने का संकल्प लिया था।

भारत में स्थिति:
भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी है। साल 2006 में इनकी संख्या घटकर 1,411 रह गई थी, लेकिन संरक्षण प्रयासों के चलते 2018 की गणना में यह बढ़कर 2,967 हो गई। भारत के प्रमुख बाघ अभयारण्य जैसे कि रणथंभौर, कान्हा, बांधवगढ़, सुंदरबन और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई है।

बाघों के विलुप्त होने के कारण:
– जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवास का नुकसान
– अवैध शिकार और तस्करी
– मानव-बाघ संघर्ष
– भोजन की कमी और जलवायु परिवर्तन

संरक्षण के उपाय:
– संरक्षित वन क्षेत्रों का विस्तार
– अवैध शिकार पर कड़ी निगरानी
– स्थानीय समुदायों की भागीदारी
– लोगों में जागरूकता फैलाना

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