Home मुख्य ख़बरें मुंशी प्रेमचंद जयंती: यथार्थवादी साहित्य के ‘कहानी सम्राट’ को श्रद्धांजलि

मुंशी प्रेमचंद जयंती: यथार्थवादी साहित्य के ‘कहानी सम्राट’ को श्रद्धांजलि

4
0

मुंशी प्रेमचंद, हिंदी और उर्दू साहित्य के महानतम लेखकों में से एक, का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही गांव में हुआ था। उन्हें “कहानी सम्राट” कहा जाता है। प्रेमचंद ने भारतीय समाज की सच्चाई, समस्याएं और संघर्ष को जिस ईमानदारी और संवेदनशीलता से शब्दों में पिरोया, वह आज भी पाठकों के दिल को छूता है।

प्रेमचंद का साहित्यिक योगदान:
प्रेमचंद ने अपने लेखन में ग्रामीण जीवन, किसान, दलित, स्त्री, मजदूर और समाज के उपेक्षित वर्गों की पीड़ा को मुखर रूप से प्रस्तुत किया। उनकी कहानियां और उपन्यास सामाजिक यथार्थ का आईना हैं।

प्रमुख रचनाएं:
– गोदान – एक गरीब किसान होरी की पीड़ा और उसकी ईमानदारी की कथा।
– गबन – मध्यम वर्ग की आकांक्षाएं और नैतिक पतन का चित्रण।
– निर्मला, कफन, ईदगाह, पूस की रात, सद्गति, शतरंज के खिलाड़ी – इन रचनाओं में सामाजिक विषमता, धार्मिक आडंबर, स्त्री शोषण, गरीबी जैसे मुद्दों को बेहद मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है।

भाषा और शैली:
प्रेमचंद की भाषा सहज, सरल और भावपूर्ण थी। उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को जनसरोकार का माध्यम बनाया और उर्दू में भी बेहतरीन लेखन किया।

समाज पर प्रभाव:
प्रेमचंद सिर्फ साहित्यकार नहीं, समाज सुधारक भी थे। उन्होंने कलम को समाज के उत्थान का हथियार बनाया। वे मानते थे कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here