आज भारत की पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज जी की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर पूरा राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व तथा मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण राजनयिक कार्यशैली को याद करता है।
सुषमा जी का कार्यकाल बतौर विदेश मंत्री (2014–2019) भारतीय राजनीति में एक ऐसा अध्याय है, जिसे मानवीय संवेदनशीलता, कूटनीतिक दक्षता और अत्यंत प्रभावी नेतृत्व के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने जिस तरह सोशल मीडिया को एक संजीवनी की तरह विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए प्रयोग किया, वह एक ऐतिहासिक पहल थी।
जिम्मेदारी से भरी मानवीय पहल: विदेशों में फंसे नागरिकों की वापसी
विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा जी ने कई जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारतीय नागरिकों की सकुशल वापसी सुनिश्चित की। कुछ प्रमुख उदाहरण:
ऑपरेशन राहत (2015) – यमन संकट
जब यमन में गृहयुद्ध के चलते सैकड़ों भारतीय जान के खतरे में थे, तब सुषमा स्वराज ने ‘ऑपरेशन राहत’ का कुशल नेतृत्व किया। भारतीय नौसेना, एयरफोर्स और एयर इंडिया की मदद से 5,000 से अधिक भारतीयों के साथ 2,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को भी वहां से सुरक्षित निकाला गया। यह मिशन दुनिया भर में सराहा गया।
इराक में फंसे 46 नर्सों की रिहाई (2014)
ISIS के आतंक के बीच जब भारतीय नर्सें इराक में फंसी थीं, तब सुषमा जी ने पूरी सूझबूझ और राजनयिक संपर्कों के माध्यम से बिना किसी शोरगुल के सभी को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया।
सऊदी अरब में श्रमिकों की मदद
सऊदी अरब में हजारों भारतीय मजदूर नौकरी गंवाकर भूख और बदहाली से जूझ रहे थे। सुषमा जी ने न सिर्फ वहां भारतीय दूतावासों को सक्रिय किया, बल्कि वहां की सरकार से बातचीत कर राहत सामग्री और वापसी की व्यवस्था करवाई।
ट्विटर पर मंत्री, हर भारतीय की ‘दीदी’
सुषमा स्वराज शायद दुनिया की पहली ऐसी विदेश मंत्री थीं जो ट्विटर के ज़रिए सीधे आम जनता से जुड़ गईं। कोई पासपोर्ट समस्या हो, कोई नागरिक विदेश में फंसा हो, या मेडिकल वीज़ा की ज़रूरत—हर समस्या का समाधान उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर किया।
उनकी एक प्रसिद्ध पंक्ति थी—
> “यदि आप मंगल ग्रह पर भी फंसे हैं, तो भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा।”
यह केवल शब्द नहीं थे, यह एक भरोसा था जो हर भारतीय ने महसूस किया।
विनम्रता में छुपी दृढ़ता: एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
सुषमा जी का व्यक्तित्व सौम्य, लेकिन निर्णयों में अत्यंत दृढ़ था। संसद में प्रभावशाली भाषण, विपक्ष और सत्ता दोनों में गरिमा के साथ भूमिका निभाना, और नारी शक्ति का एक आदर्श उदाहरण बनना—यह सब उनकी पहचान थे। उनकी संवाद शैली में शालीनता थी, पर विचारों में स्पष्टता और निर्भीकता भी।
वे राजनीति को सेवा मानती थीं, और यही कारण था कि हर भारतीय उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, एक संरक्षक की तरह देखता था।
श्रद्धांजलि
सुषमा स्वराज जी ने अपने कार्यकाल से यह सिद्ध कर दिया कि सशक्त नेतृत्व केवल आवाज़ ऊँची करने से नहीं, बल्कि समय पर सही निर्णय लेने और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर सेवा करने से बनता है।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली, समर्पण और संवेदनशीलता भारतीय राजनीति और विदेश सेवा के लिए एक मिसाल बनकर हमेशा जीवित रहेगी।
“नेतृत्व वो है, जो शब्दों से नहीं, कर्मों से बोलता है – और सुषमा जी इसका सजीव उदाहरण थीं।”









