जब एप्पल के सीईओ टिम कुक 2025 में व्हाइट हाउस पहुँचे, तो वह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट के लिए नहीं आए थे। उनके साथ था एक विशेष संदेश — तकनीक, राष्ट्रवाद और वैश्विक रणनीति का मिलाजुला प्रतीक। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक अनोखा तोहफा सौंपा: एक गोल गोरिल्ला ग्लास डिस्क, जिसके केंद्र में एप्पल का लोगो चमक रहा था, और उस पर लिखा था — “Made in USA 2025″। यह डिस्क 24 कैरेट गोल्ड-प्लेटेड स्टैंड पर टिकी थी, जो सिर्फ एक गिफ्ट नहीं, बल्कि एप्पल की भविष्य की दिशा का प्रतीक थी।
अमेरिका को निवेश, भारत को निर्माण — एप्पल की दोहरी चाल
इस मुलाकात के दौरान टिम कुक ने अमेरिका में $100 बिलियन (₹9 लाख करोड़) के भारी-भरकम निवेश की घोषणा की। यह कदम अमेरिका को टेक्नोलॉजी निर्माण की नई धुरी बनाने की कोशिश का हिस्सा है। लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भारत में लिखा जा रहा है।
2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में भारत में 2.39 करोड़ iPhones बनाए गए — यह आंकड़ा पिछले साल से 53% ज्यादा है। इसके साथ ही, भारत से iPhone निर्यात भी ₹1.94 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष ₹1.26 लाख करोड़ था। यानी 52% की ज़बरदस्त वृद्धि।
भारत से अमेरिका: चीन को पीछे छोड़ता निर्माण हब
अप्रैल 2025 में भारत ने एक ऐतिहासिक मुकाम छू लिया। अमेरिका भेजे गए iPhones में से 33 लाख यूनिट्स भारत से गए, जबकि चीन से केवल 9 लाख यूनिट्स। इससे साफ है कि अब अमेरिका में बिकने वाले 78% iPhones भारत में बने हैं, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 53% था। यानी भारत, अब चीन की जगह लेता हुआ दुनिया की नई मैन्युफैक्चरिंग पावर बन रहा है।
क्या एप्पल वैश्विक राजनीति की नई स्क्रिप्ट लिख रहा है?
अब सवाल यह है कि क्या एप्पल सिर्फ एक टेक कंपनी है, या फिर एक वैश्विक रणनीतिक खिलाड़ी बन चुका है? अमेरिका में निवेश और भारत में निर्माण — यह केवल लागत और मुनाफे की बात नहीं है, यह एक नया संकेत है कि भविष्य की सप्लाई चेन भरोसे और राजनीति पर आधारित होगी।
टिम कुक का वह गोल्डन डिस्क केवल एक शो-पीस नहीं था। वह यह बताने आया था कि एप्पल अब केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि “Made in India, Powered by America” नामक नई वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है।









