सरला ठकराल का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने उस दौर में अपनी उड़ान भरी, जब महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकलने की भी हिम्मत नहीं करती थीं। 8 अगस्त 1914 को जन्मी सरला ठकराल ने 21 वर्ष की उम्र में 1936 में लाइसेंस प्राप्त कर भारत की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल किया।
वे पारंपरिक साड़ी पहनकर विमान उड़ाया करती थीं, जो उस समय के सामाजिक दृष्टिकोण को चुनौती देने वाली बात थी। उन्होंने जिप्सी मॉथ नामक दो सीटों वाले विमान से अपनी पहली उड़ान भरी थी। उनके पति पी.डी. शर्मा खुद एक प्रशिक्षित पायलट थे, जिनसे प्रेरणा लेकर सरला ने भी उड़ान की दुनिया में कदम रखा।
पति की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने एविएशन छोड़ कला और डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी अपने हुनर का लोहा मनवाया। उन्होंने चित्रकला, फैशन और एम्ब्रॉयडरी में डिप्लोमा प्राप्त किया और आत्मनिर्भर बनीं।
सरला ठकराल सिर्फ एक पायलट नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल थीं। आज उनकी जयंती पर उन्हें नमन करते हुए, हम सभी को उनसे यह सीख मिलती है कि सपनों को उड़ान देने के लिए साहस, दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।









