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गायों की दुर्दशा पर सामाजिक संगठनों की अनूठी पहल: सिटी बस में किया जागरुकता अभियान

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रायपुर संवाददाता – रघुराज

गाय हमारी माता है, यह सिर्फ एक कहावत नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। रायपुर के सामाजिक संगठनों ने इसी भावना को जगाने और बेसहारा गायों की दुर्दशा पर सरकार का ध्यान खींचने के लिए एक अनूठा अभियान शुरू किया है। इस अभियान में, गऊ पुत्री माता यसोमति के नेतृत्व में सिटी बसों में घूमकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और उनका समर्थन मांगा जा रहा है।

गायों की दुर्दशा पर सामाजिक संगठनों की अनूठी पहल: सिटी बस में किया जागरुकता अभियान
रायपुर: छत्तीसगढ़ में बेसहारा और पीड़ित गायों की दयनीय स्थिति को लेकर सामाजिक संगठनों और गौसेवकों ने राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया है। इस अभियान की शुरुआत राजधानी रायपुर से हुई, जहाँ गौपुत्री माता यसोमति ने अनूठे तरीके से लोगों को जागरूक किया। 08 अगस्त 2025 को, उन्होंने सिटी बस में सवार होकर यात्रियों से गायों की सुरक्षा, देखभाल और सम्मानजनक व्यवस्था के लिए उनका समर्थन मांगा और आवेदन भरवाए।

यह अभियान केवल रायपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी एक साथ चल रहा है। संगठनों का कहना है कि उनके साथी राज्यभर के अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी आवेदन सौंप रहे हैं, ताकि यह विषय केवल एक स्थान तक सीमित न रहकर एक प्रदेशव्यापी आंदोलन बन सके। यह पहल दिखाती है कि गौ-सेवा की भावना छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में जीवित है और लोग इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।

गौरवशाली इतिहास और वर्तमान की दयनीय स्थिति

गौपुत्री माता यसोमति ने अपनी बात रखते हुए कहा कि गायें सदियों से भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि गायों का दूध, गोबर और गौमूत्र हमारे जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं। लेकिन, आज उन्हें सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है। गायों को कचरे के ढेर में खाते हुए देखना, प्लास्टिक निगलना और दुर्घटनाओं का शिकार होना एक दर्दनाक वास्तविकता है, जो हमारे समाज के लिए शर्मनाक है। इस स्थिति को बदलना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सरकार से प्रमुख माँगें

गौसेवकों ने राज्य सरकार से कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उनकी प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:

प्रत्येक जिले में सरकारी गौशालाएँ स्थापित की जाएँ: इन गौशालाओं में बेसहारा और बीमार गायों की उचित देखभाल की व्यवस्था हो।

विशेष पशु एंबुलेंस सेवा: बीमार और घायल गायों को समय पर उपचार मिल सके, इसके लिए हर जिले में विशेष पशु एंबुलेंस सेवा शुरू की जाए।

गोवंश तस्करी व कटान पर सख्त कार्रवाई: अवैध तस्करी और गोवंश कटान पर सख्त कानून बनाकर कार्रवाई की जाए ताकि इस अमानवीय कार्य को रोका जा सके।

गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए योजनाएँ: गौसेवा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएँ और जागरूकता कार्यक्रम चलाए, ताकि लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें।

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग

गौसेवकों ने राज्य सरकार से एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर 1 सितंबर 2025 से पहले इन मांगों पर विधिवत निर्णय लिया जाए। उनका मानना है कि ऐसा करने से छत्तीसगढ़ को संस्कृति और गौसेवा के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी। गौपुत्री माता यसोमति ने यह भी कहा कि गायें केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अब समय आ गया है कि समाज और सरकार दोनों मिलकर अपने इस दायित्व को निभाएं।

यह अभियान एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल गायों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है, बल्कि समाज और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

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