बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
आदिवासी, दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है जिसका अर्थ है आदिकाल से इस देश में निवास करने वाले 2011 जनगणना के अनुसार भारत में आदिवासी भारत की जनसंख्या का 8.6% हैं। भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए ‘अनुसूचित जनजाति’ पद का उपयोग किया गया है। भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में गोंड, हल्बा ,मुण्डा, ,खड़िया, बोडो, कोल, भील,नायक, सहरिया, संथाल ,भूमिज, हो, उरांव, बिरहोर, पारधी, असुर, भिलाला,आदि हैं।विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के स्वदेशी लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए हर स्कूलों,भवनों में मनाया जाता है। इस दिन, आदिवासी समुदायों की संस्कृतियों, भाषाओं और अस्तित्व को मान्यता दी जाती है, और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला जाता है। इसी क्रम में डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल उलनार के प्रांगण में भी प्राचार्य श्री मनोज शंकर जी के मार्गदर्शन में विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम आयोजित की गई जिसमें कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई। जिसमें कक्षा 12वीं की छात्रा तमन्ना बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस पर भाषण की प्रस्तुति दी।

शिक्षिका श्रीमती मोनिका साहू ने मंच संचालन करते हुए सभी को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दी एवं आदिवासियों के जनजीवन से परिचित कराया।विद्यालय के प्राचार्य जी ने भी सभा को संबोधित करते हुए विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज जनजातीय समाज शिक्षा अर्जित कर मानव अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। शिक्षित जनजातीय समाज अपने मूल पहचान,संस्कृति,भाषा,खान-पान धरोहर को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए प्रयासरत है।आज जनजातीय समाज सशक्त हो रहे हैं आत्मनिर्भरता तथा सहज जीवन जीने की कला हमें उनसे सीखने चाहिए। इस तरह आदिवासियों के ऐतिहासिक और अतुलनीय योगदान से छात्रों को अवगत कराया।आदिवासियों के पारंपरिक वेशभूषा धारण किए कक्षा यूकेजी के छात्र गणेश कश्यप उनकी संस्कृति नृत्य को प्रदर्शित करते हुए आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक श्री देव सिंह नेताम ने भी सभी को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासियों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व आदिवासी दिवस पूरे विश्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक विश्व का सबसे बड़ा मंच स्विट्जरलैंड के एक शहर जेनेवा में 1984 को आयोजन किया गया उसके बाद 9 अगस्त 1994 को पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की गई तब से हर वर्ष विश्व आदिवासी दिवस मनाकर हम दुनिया की स्वदेशी आबादी के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों को आदिवासी संस्कृति और उनके अधिकारों के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया। यह कार्यक्रम आदिवासी समुदायों के प्रति जागरूकता और सम्मान बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम था।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य,शिक्षक एवं समस्त विद्यार्थीगण उपस्थित थे।









