जांजगीर- चांपा संवाददाता- राजेन्द्र जयसवाल
जिला जांजगीर-चांपा जिला जांजगीर चांपा कलेक्टर में लंबे समय से कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम आम जनता की समस्याएँ सुनने और उनका समाधान करने का अहम जरिया रहा है। पहले यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होता था, जिससे दूर-दराज़ से आने वाले लोग सुबह ही अपनी समस्याएँ रख पाते थे और समय पर घर लौट जाते थे।
लेकिन नए जिला कलेक्टर जन्मेजय मोहब्बा के आने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया। अब पहले टी.एल. (टाइम लिमिट) बैठक आयोजित होती है और उसके बाद दोपहर 2 बजे से जनदर्शन शुरू किया जाता है। इस फेरबदल का सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है।
दूरस्थ गाँवों से आने वाले महिलाएँ, बुज़ुर्ग और बच्चे सुबह से ही कलेक्टर कार्यालय के बाहर इंतज़ार करते हैं। तेज़ धूप, उमस और भूख-प्यास के बीच कई घंटे इंतजार करना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। कई बुजुर्गों और महिलाओं को स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी वे मजबूरी में अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा सरकार के आने के बाद आम जनता की परेशानी और बढ़ गई है। पहले जहाँ जनदर्शन समय पर शुरू होता था, अब यह देरी से होने लगा है और प्रशासनिक बैठकें जनता की समस्याओं से पहले प्राथमिकता पा रही हैं।
जनता की नाराज़गी
ग्रामीणों का आरोप है कि यह बदलाव जनता के हित में नहीं है।
महिलाओं का कहना है कि छोटे बच्चों के साथ घंटों इंतजार करना मुश्किल होता है।
कई बुज़ुर्गों का कहना है कि वे सुबह से भूखे-प्यासे बैठते हैं और शाम होते-होते ही उनकी सुनवाई होती है।

मांगें और सवाल
जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि जनदर्शन का समय फिर से पहले जैसा सुबह 11 बजे किया जाए, ताकि आम लोगों को कम से कम इंतजार करना पड़े। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जनता की समस्याओं को सुनना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए या लंबी बैठकें?
जिला प्रशासन को चाहिए कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे जनता को सुविधा हो, न कि परेशानी।









