जांजगीर- चांपा संवाददाता- राजेन्द्र जयसवाल
जिला जांजगीर-चांपा, बलौदा ब्लॉक से ग्राम पंचायत भैंसतरा निवासी नरेंद्र यादव (28 वर्ष), जो पेशे से ड्राइवर थे, उनकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। घटना 27 मई 2025, मंगलवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच बिरगहनी कटरा-बलौदा मार्ग पर हुई, जहां नरेंद्र यादव लहूलुहान अवस्था में पाए गए थे। 112 की सहायता से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होता है। अभी तक एफ, आई,आर,
नहीं हो पाया पाया और मृतिक नरेंद्र यादव की पत्नी दुर्गा यादव ने चार संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद न तो किसी की गिरफ्तारी हुई, न ही कोई ठोस कार्रवाई। पीड़ित परिवार और अखिल भारतीय यादव महासभा के प्रतिनिधियों ने जांजगीर पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस केवल “जांच जारी है” की बात कहकर मामले को टाल रही है।
थाना में महिला से बर्बरता – पुलिस की क्रूरता की हदें पार
घटना का दूसरा और चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब 3 अगस्त 2025, रविवार को बलौदा थाना प्रभारी ने भैंसतरा सरपंच को फोन कर मृतक की पत्नी दुर्गा यादव और उनके भतीजे को थाना बुलाया। दुर्गा यादव पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें थाना में लाया गया।
थाना पहुंचने पर विवेचक ने उन्हें पूछताछ के लिए एक कमरे में ले जाकर कथित रूप से दोनों हाथों और पैरों को पकड़ा और दो महिला आरक्षकों ने उनके गाल और शरीर के अन्य हिस्सों पर जमकर मारपीट की। यह सब तब हुआ जब पीड़िता पहले से ही सदमे और कमजोरी की स्थिति में थीं। पीड़िता का कहना है कि इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वह दो दिनों तक चलने-फिरने की स्थिति में नहीं रही।
क्या यही है महिला सुरक्षा का दावा
सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा महिला सुरक्षा और संवेदनशीलता के तमाम दावे इस घटना से खोखले साबित हो रहे हैं। न्याय की मांग करने गई एक अबला महिला को थाने में प्रताड़ित किया गया, उसे अपमानित और पीड़ित किया गया। यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि कानून के मूलभूत सिद्धांतों का भी घोर अपमान है।
जनता और समाज की मांग – दोषियों पर हो कड़ी कार्यवाही
इस पूरे मामले में अब यादव समाज, सामाजिक संगठन, और आम जनता आक्रोशित है। बलौदा थाना प्रभारी, संबंधित महिला आरक्षकों और विवेचक पर सख्त कार्यवाही की मांग की जा रही है। पीड़ित परिवार को सुरक्षा, न्याय और सम्मान मिलना चाहिए — यह केवल एक महिला की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे समाज की चेतना का सवाल है।
हम यह पूछना चाहते हैं:
दो महीने बाद भी आरोपी क्यों बाहर हैं?
एक पीड़ित महिला के साथ थाने में बर्बरता क्यों हुई?
क्या यह “जनता के सेवक” कहलाने वाली पुलिस का चेहरा है?
इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित होनी चाहिए, और दोषियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन पर कड़ी कानूनी कार्यवाही
इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित होनी चाहिए, और दोषियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। पीड़िता दुर्गा यादव को उचित न्याय, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और महिला सुरक्षा के नाम पर धब्बा होगा।
जांजगीर चांपा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कश्यप से बाइट लेना चाह गया था तो फोन रिसीव नहीं किया गया








