अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि हर वर्ष 13 अगस्त को मनाई जाती है। वह मराठा साम्राज्य की एक महान शासिका थीं, जिन्होंने 1767 से 1795 तक मालवा क्षेत्र पर शासन किया। उनकी शासन शैली न्यायप्रिय, धर्मनिष्ठ और जनकल्याणकारी थी, जिसके कारण उन्हें “पुण्यश्लोक” की उपाधि दी गई।
अहिल्याबाई होल्कर: एक प्रेरणादायक जीवन
– जन्म: 31 मई 1725, चौंडी गांव (वर्तमान महाराष्ट्र)
– निधन: 13 अगस्त 1795, इंदौर
– उपाधि: पुण्यश्लोक राजमाता
अहिल्याबाई ने अपने शासनकाल में काशी विश्वनाथ, सोमनाथ और गया के विष्णुपद मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत धन से इन कार्यों को संपन्न किया, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और जनसेवा की भावना स्पष्ट होती है।
पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें सत्संग, भजन, शोभायात्रा और सामाजिक सेवा के कार्य शामिल होते हैं। इस दिन को “अहिल्या उत्सव” के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें उनके जीवन और कार्यों को स्मरण किया जाता है।
प्रेरणा का स्रोत
अहिल्याबाई होल्कर का जीवन आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी न्यायप्रियता, प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक सुधारों के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान प्रदान करता है।
उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।









