पुणे की कॉरपोरेट कल्पना थोरात ने अपनी बेटी को कबूतरों से फैलने वाले संक्रमण की वजह से खो दिया। इस दर्दनाक अनुभव के बाद अब वे लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए आगे आई हैं। उनका कहना है कि आमतौर पर लोग कबूतरों से होने वाली बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन समय रहते जानकारी और सावधानी बरती जाए तो बड़ी त्रासदी से बचा जा सकता है।
बेटी की मौत बनी चेतावनी
कल्पना थोरात की 22 वर्षीय बेटी कुछ समय पहले बीमार पड़ी। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि उसे क्रिप्टोकोकोसिस (Cryptococcosis) नामक संक्रमण हुआ है, जो कबूतरों की बीट (droppings) से फैलता है। इस संक्रमण ने धीरे-धीरे उसके फेफड़े और दिमाग को प्रभावित किया और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
कबूतरों से फैलने वाला खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार कबूतरों की बीट में मौजूद फंगस इंसान के फेफड़ों तक पहुंचकर संक्रमण फैला सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह संक्रमण जानलेवा हो सकता है। अक्सर इसे शुरुआती दौर में सामान्य फ्लू या सर्दी-जुकाम जैसा मान लिया जाता है, जिससे गंभीर स्थिति बनने तक इलाज में देर हो जाती है।
जागरूकता की मुहिम
कल्पना थोरात ने कहा – “लोगों को यह जानना जरूरी है कि कबूतर केवल प्रदूषण ही नहीं, गंभीर बीमारियों के वाहक भी हैं। मेरी बेटी की मौत एक चेतावनी है। अगर मैं और मेरी बेटी पहले से इस संक्रमण के बारे में जानते, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। अब मैं चाहती हूं कि और परिवार इस दुख से न गुजरें।”
वे अब समाज में अभियान चलाकर लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि घरों की खिड़कियों, छतों और सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों की भीड़ न जुटने दें, और उनकी बीट से संपर्क में आने से बचें।
डॉक्टरों की सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि—
कबूतरों की बीट को कभी न छुएं।
जहां अधिक मात्रा में कबूतर रहते हैं, वहां मास्क लगाकर ही जाएं।
अगर लगातार खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
प्रशासन से अपील
कल्पना थोरात ने स्थानीय प्रशासन से भी अपील की है कि कबूतरों को दाना डालने पर रोक लगाने, इमारतों और सार्वजनिक स्थलों पर सफाई अभियान चलाने और जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत है।









