जांजगीर- चांपा संवाददाता- राजेन्द्र जयसवाल

जिला जांजगीर-चांपा चांपा वार्ड नंबर 22, कोरबा रोड, तिलक नगर, चांपा में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हल षष्ठी, जिसे ललही षष्ठ या हर छठ के नाम से भी जाना जाता है, भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित एक पावन पर्व है। इस वर्ष यह पर्व गुरुवार, 14 अगस्त 2025 को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया।
वार्ड नंबर 22, कोरबा रोड, तिलक नगर, चांपा में पंडित महेंद्र कुमार दुबे के कुशल वचनों में हल षष्ठी की पौराणिक कथा का वाचन किया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पंडित महेंद्र कुमार दुबे ने कथा में बताया कि यह पर्व न केवल भगवान बलराम के जन्म की स्मृति है, बल्कि सत्यवादिता, पशुधन की महत्ता और स्त्री-शक्ति की श्रद्धा का भी प्रतीक है।
उन्होंने विस्तार से उस प्राचीन प्रसंग का वर्णन किया जिसमें एक ग्वालिन, अपनी लालच और असत्य के कारण अपने नवजात शिशु को खो बैठी, परंतु प्रायश्चित और सच्चाई के मार्ग पर लौटने से भगवान की कृपा से उसका बच्चा पुनः जीवित हो गया। कथा में गाय-भैंस के दूध में मिलावट और झूठे व्यापार को पाप का कारण बताया गया, जबकि सच्चाई, पशुपालन के प्रति श्रद्धा और समाज के प्रति ईमानदारी को सुख-समृद्धि का मार्ग बताया गया।
इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं ने हल षष्ठी का व्रत रखकर, मिट्टी के बैल और हल की पूजा कर, पारंपरिक झूठा भोजन न करने की प्रतिज्ञा निभाई। महिलाओं ने खेत-खलिहान और गाय-बैलों की महत्ता को याद करते हुए भगवान बलराम से परिवार की रक्षा, संतान सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
पंडित महेंद्र कुमार दुबे ने अंत में यह संदेश दिया कि—
“जीवन में सत्य, परिश्रम और आस्था का संगम ही वास्तविक बल है। असत्य से क्षणिक लाभ तो मिल सकता है, लेकिन सच्चाई ही अंततः जीवन को सुख और सम्मान देती है।”
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती हुआ और प्रसाद वितरण के साथ पर्व का समापन हुआ। तिलक नगर क्षेत्र में हल षष्ठी का यह आयोजन सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का सुंदर उदाहरण बन गया।









