अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को अलास्का के एंकोरेज में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक से पहले ट्रंप ने दावा किया है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण रूस वार्ता के लिए तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि रूस ऐसा नहीं करता, तो वह अपने ‘दूसरे सबसे बड़े ग्राहक’ को खो सकता था।
भारत पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% “प्रतिशोधात्मक” टैरिफ और रूस से तेल और हथियारों की खरीद पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है। इस कदम का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बनाना है, क्योंकि भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है।
भारत की ऊर्जा रणनीति
भारत ने 2024 में अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 35-40% रूस से किया, जो 2021 में केवल 3% था। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ के बाद, भारतीय राज्य-स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कटौती की है और सऊदी अरब से आपूर्ति बढ़ाई है।
ट्रंप-पुतिन बैठक के संभावित परिणाम
ट्रंप और पुतिन की बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौता करना है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि रूस सहयोग नहीं करता, तो भारत जैसे देशों पर और अधिक टैरिफ लगाए जा सकते हैं।









