हर साल 20 अगस्त को भारत में अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे – सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायो गैस आदि के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
अक्षय ऊर्जा का महत्व
आज दुनिया तेजी से विकास कर रही है, लेकिन इसके साथ-साथ ऊर्जा की खपत भी बढ़ रही है। यदि हम केवल कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे सीमित संसाधनों पर निर्भर रहेंगे तो आने वाले समय में इनका भंडार खत्म हो जाएगा और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ेगा।
इसीलिए अक्षय ऊर्जा का उपयोग आवश्यक है, क्योंकि यह –
अक्षय (असीमित) है,
पर्यावरण के अनुकूल है,
और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देती है।
भारत और अक्षय ऊर्जा
भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सौर ऊर्जा मिशन के अंतर्गत गाँव-गाँव में सोलर लाइटें और पैनल लगाए जा रहे हैं।
पवन ऊर्जा संयंत्र तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में स्थापित किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बायो गैस संयंत्र भी बनाए जा रहे हैं।
अक्षय ऊर्जा दिवस का उद्देश्य
इस दिन विभिन्न विद्यालयों, कॉलेजों और संस्थानों में रैलियाँ, संगोष्ठियाँ, प्रदर्शनी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि लोग समझ सकें कि ऊर्जा की बचत और अक्षय ऊर्जा का उपयोग हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए कितना जरूरी है।
“अक्षय ऊर्जा दिवस हमें यह संदेश देता है कि हमें सीमित संसाधनों पर निर्भर न रहकर प्रकृति की असीमित शक्तियों का उपयोग करना चाहिए। यदि हम सभी अक्षय ऊर्जा के महत्व को समझकर इसे अपनाएँ, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य दे सकते हैं।”









