ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर बढ़ती सट्टेबाजी और जुए की लत ने कई घरों को तबाह कर दिया है। कहीं बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं तो कहीं लोग कर्ज में डूबकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब डिजिटल सट्टेबाजी पर नकेल कसने की तैयारी कर चुकी है।
लोकसभा में पेश होगा नया बिल
केंद्र सरकार बुधवार को ऑनलाइन मनी गेमिंग रेगुलेशन बिल लोकसभा में पेश करेगी। इसके तहत—
किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था को ऑनलाइन मनी गेम्स में लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।
रियल मनी गेमिंग के सभी विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।
केवल ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड नॉन-मोनेटरी गेम्स को प्रोत्साहन मिलेगा।
बिल के मुख्य उद्देश्य
1. देशभर में डिजिटल सट्टेबाजी और जुए को नियंत्रित करना।
2. गेमिंग की लत और धोखाधड़ी जैसी सामाजिक समस्याओं से निपटना।
3. अलग-अलग राज्यों के जुआ कानूनों के बीच एक समान नियम लागू करना।
4. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को केंद्रीय नियामक बनाना।
5. अवैध या बिना पंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का अधिकार अधिकारियों को देना।
टैक्स और सख्त प्रावधान
अक्टूबर 2023 से ऑनलाइन गेमिंग पर 28% GST लागू है, जिसे वित्त वर्ष 2025 से और बढ़ाकर 30% टैक्स किया गया है।
विदेशी गेमिंग ऑपरेटर भी अब टैक्स नेटवर्क के दायरे में होंगे।
दिसंबर 2023 से अनधिकृत सट्टेबाजी पर 7 साल तक जेल और भारी जुर्माना तय किया गया है।
अब तक की कार्रवाई
2022 से फरवरी 2025 के बीच सरकार ने 1,400 से अधिक जुआ और सट्टेबाजी साइट्स व ऐप्स को ब्लॉक किया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी गेमिंग विज्ञापनों में जोखिम और लत के चेतावनी संदेश अनिवार्य किए हैं।









