सारंगढ़ संवाददाता – अशोक मनहर
सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़):- बिलाईगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम मौहारभाठा जोरा में 21 तारीख को शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही सामने आई। पत्रकारों की टीम एक गंभीर मामले की पड़ताल के लिए जा रही थी, तभी दोपहर करीब 3 बजे प्राइमरी स्कूल पूर्ण रूप से बंद पाया गया। जब बच्चों और ग्रामीणों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उस दिन बच्चों को 2–3 बजे ही छुट्टी दे दी गई थी। एक विद्यार्थी ने स्पष्ट कहा कि “आज स्कूल जल्दी छुट्टी हो गया।”
इस संबंध में स्कूल के हेड मास्टर टी. आर. निराला से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि “आज मीटिंग था और स्कूल में मैं अकेला था, अन्य शिक्षक छुट्टी पर थे। इस कारण मैंने संस्था के प्राचार्य कमलेश साहू से पूछा तो उन्होंने कहा कि बच्चों को छुट्टी देकर मीटिंग में चले जाओ।” बाद में जब प्राचार्य कमलेश साहू से बात की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि उन्हीं के निर्देश पर स्कूल समय से पहले छुट्टी दी गई। शिक्षा विभाग के नियमानुसार यदि किसी दिन किसी स्कूल में केवल एक ही शिक्षक उपस्थित है और उसे मीटिंग अथवा अन्य कार्य से जाना आवश्यक है, तो उस स्थिति में नजदीकी विद्यालय से शिक्षक की व्यवस्था कर स्कूल का संचालन किया जाना चाहिए।
मौहारभाठा जोरा से मात्र 500-700 मीटर की दूरी पर जोरा पंचायत में ही प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालय हैं, जिनमें 10–12 शिक्षक उपलब्ध रहते हैं। इसके बावजूद पास के विद्यालयों से शिक्षक व्यवस्था नहीं की गई और प्राचार्य के निर्देश पर हेड मास्टर ने सीधे बच्चों को छुट्टी दे दी। यह कदम न केवल विभागीय आदेश का उल्लंघन है बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) के प्रावधानों का भी उल्लंघन है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को निर्धारित समय तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रावधान है।
किस पर क्या कार्यवाही बनती है?
1. हेड मास्टर टी.आर. निराला समय से पहले बच्चों को छुट्टी देकर अपने कर्तव्य का उल्लंघन किया। उन पर कारण बताओ सूचना, विभागीय जांच व अनुशासनात्मक कार्यवाही बनती है।
2. प्राचार्य कमलेश साहू नियम जानते हुए भी हेड मास्टर को स्कूल बंद कर मीटिंग में जाने का मौखिक आदेश दिया। उनके विरुद्ध भी निलंबन/जांच योग्य अपराध है।
यह पूरा मामला शिक्षा व्यवस्था की गंभीर अनदेखी को दर्शाता है। विद्यालयों में बच्चों को समय से पहले छुट्टी देना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के शिक्षा अधिकार का हनन भी है। यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह लापरवाही आने वाले समय में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।









