नई दिल्ली, 24 अगस्त।
भारत तकनीकी क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि देश का पहला ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप इसी वर्ष के अंत तक बाजार में उपलब्ध होगा। यह कदम न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में देश की स्थिति को और सशक्त बनाएगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में सरकार लगातार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ा रही है। सेमीकंडक्टर चिप का स्वदेशी उत्पादन इन अभियानों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। अभी तक भारत को अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए विदेशी चिप्स पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषज्ञों का मानना है कि जब घरेलू स्तर पर चिप का उत्पादन शुरू होगा, तो आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप सेक्टर को नई रफ्तार
सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और डिफेंस उपकरणों तक में होता है। सरकार का दावा है कि भारत में बने चिप्स का उपयोग स्थानीय कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित करेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और स्टार्टअप इकोसिस्टम में नए अवसर खुलेंगे।

रोजगार और निवेश की संभावना
टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से लाखों नए रोजगार के अवसर बनेंगे। चिप निर्माण इकाइयों में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में भी अप्रत्यक्ष नौकरियां बढ़ेंगी। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका
कोविड महामारी के बाद से दुनिया भर में चिप्स की कमी (चिप शॉर्टेज) ने इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में भारत का यह कदम वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी राहत भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि अन्य देशों को भी चिप निर्यात करने में सक्षम होगा।









