हर वर्ष 26 अगस्त को महिला समानता दिवस (Women’s Equality Day) मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को समान अधिकार दिलाने और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने के लिए समर्पित है। अमेरिका में 1920 में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला था, और उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में यह दिवस मनाना प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे यह दिन वैश्विक महत्व का हो गया और महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और समान अवसरों की चर्चा का प्रतीक बन गया।
महिला समानता का महत्व
महिलाओं ने जीवन के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता को सिद्ध किया है। चाहे वह राजनीति हो, शिक्षा, विज्ञान, खेल, साहित्य या कला—हर जगह महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। लेकिन आज भी कई जगह महिलाओं को असमानता, भेदभाव और अन्याय का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि महिला समानता दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि क्या समाज वास्तव में महिलाओं को उनके अधिकार और सम्मान दे पा रहा है।
भारत में महिला समानता
भारत में भी महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। संविधान ने महिलाओं को समानता का अधिकार दिया है। समय-समय पर कानून बनाए गए—जैसे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम—जो महिलाओं की सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करते हैं। आज भारतीय महिलाएं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, पायलट, पुलिस अधिकारी और उद्यमी बनकर समाज को दिशा दे रही हैं।
वर्तमान चुनौतियाँ
फिर भी, महिलाओं को आज भी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है—
लिंग आधारित भेदभाव
घरेलू हिंसा
शिक्षा और रोजगार में असमान अवसर
सामाजिक रूढ़िवादिता
इन चुनौतियों को समाप्त करने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर प्रयास करना होगा।
“महिला समानता दिवस हमें याद दिलाता है कि महिलाओं की प्रगति के बिना समाज की प्रगति संभव नहीं है। जब तक महिलाओं को समान अवसर, समान अधिकार और समान सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक एक न्यायपूर्ण और संतुलित समाज का निर्माण नहीं हो सकता। इसलिए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देंगे और वास्तविक समानता स्थापित करेंगे।”









