भारत पर भारीभरकम 50% टैरिफ लगाने के बाद अब अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। दरअसल, अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने H-1B वीजा पर रोक लगाने की संभावना जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर सवाल उठाते हुए कहा—क्या अब समय आ गया है कि H-1B वीजा पर रोक लगा दी जाए?
यह बयान उस दावे के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया कि वॉलमार्ट के एक अधिकारी को भारतीय H-1B कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के लिए रिश्वत दी गई। इस मामले ने अमेरिका में H-1B कार्यक्रम पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
H-1B वीजा क्या है?
H-1B वीजा की शुरुआत 1990 में हुई थी। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। यह वीजा तीन साल के लिए दिया जाता है और इसे अधिकतम छह साल तक बढ़ाया जा सकता है।
हर साल 65,000 वीजा जारी होते हैं।
20,000 अतिरिक्त वीजा उन लोगों के लिए होते हैं जिन्होंने अमेरिका से मास्टर्स या PhD की हो।
भारत लंबे समय से इस वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। खासकर IT और टेक सेक्टर के हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स हर साल इसी वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं।
अमेरिकी राजनीति में बंटवारा
हाल के दिनों में H-1B वीजा को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद साफ नज़र आ रहा है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का आरोप है कि बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर H-1B वीजा धारकों को रखती हैं, जो स्थानीय पेशेवरों के साथ अन्याय है।
वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक “शानदार कार्यक्रम” बताते हुए कहा था कि कई कंपनियों में H-1B धारक अहम भूमिका निभा रहे हैं।
USCIS का नया रुख
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने साफ कहा है कि H-1B वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी कामगारों का पूरक बनने के लिए होना चाहिए, न कि उनकी जगह लेने के लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेतन-आधारित प्राथमिकता लागू करने पर विचार कर रहा है। इसका मतलब होगा कि अधिक वेतन पाने वाले आवेदकों को पहले मौका मिलेगा।
भारतीयों पर सीधा असर
H-1B वीजा में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय पेशेवरों की होती है। IT सेक्टर के अलावा, डॉक्टर और शोधकर्ता भी इसी वीजा के तहत अमेरिका जाते हैं। अगर नियम कड़े हुए या रोक लगी, तो इसका सीधा असर भारत के आईटी उद्योग, आउटसोर्सिंग कंपनियों और भारतीय टैलेंट पर पड़ेगा।









