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कांग्रेस की कब्र खोदने के बाद बेटे को लांच करने जमीन तैयार कर रहे हैं महराज!

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(बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा)

भूपेश बघेल को भी राजनांदगांव से निपटाने में झोंक दी थी ताकत 
बेटे को लांच करने के लिए की जा रही तिकड़मबाजी 

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कुछ बड़े नेता परिवारवाद और पुत्रमोह में इस कदर अंधे हो गए चले हैं, कि उन्हें पार्टी के हित अहित का जरा भी ध्यान नहीं है। साठ से अधिक बसंत देख चुके सालों साल सत्ता सुख भोगते आए ये नेता सही मायने में सठिया गए हैं। उनके लिए पार्टी हित बेमानी हो गया है, येन केन प्रकारेण सत्ता-संगठन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराए रखने के लिए ये नेता हर वो कदम उठा रहे हैं, जिसे संगठन हित में कतई नहीं कहा जा सकता।
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस की राजनीति में एक पंडित जी भी ऐसे ही स्वार्थजीवी राजनीतिक शूरमाओं की सूची में शामिल हैं। इन महराज ने खुद की लकीर लंबी बनाने के लिए दूसरे नेताओं की लकीर को मिटाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल को राजनांदगांव संसदीय सीट से निपटाने के लिए इन पंडित जी ने भाजपा प्रत्याशी को तन, मन और धन से पूरा सहयोग दिया था, ऎसी चर्चा है। राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र की सीमाएं इन पंडित जी के गृहक्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा इन सियासी पंडित ने रायपुर नगर निगम चुनाव में अपनी रिश्तेदार भाजपाई उम्मीदवार को जिताने में भी बड़ा योगदान दिया है। सूत्रों के मुताबिक भूपेश बघेल को निपटाने के पीछे उनकी मंशा यह थी कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की नजरों में भूपेश बघेल का कद घट जाए। खुद एक प्यादे से हार गए, तो दूसरे बड़े कांग्रेस नेताओं की जीत वे सहन नहीं कर पा रहे थे, इसीलिए उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद का सहारा लिया। अब महाराज जी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं और इस मुहिम में एक राज्य के सत्तामोही शीर्ष कांग्रेस नेता का अपनी पराजय के मुख्य कारक को पूरा साथ मिल रहा है। दीपक बैज को हटवा कर भूपेश बघेल को पीसीसी अध्यक्ष बनाने की वकालत करने वाले पंडित जी ने आजकल अपनी नई दुकान शुरू कर दी है। उन्हीं के इलाके के कई कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि महराज अब शारीरिक रूप से असक्षम हो गए हैं, ज्यादा दौड़धूप नहीं सकते। इसलिए वे अपने पुत्र को कांग्रेस में लांच करने की तैयारी में हैं। ये पंडित जी जिस साजा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं वहां उन्हीं के परिवार का दबदबा रहा है। माता पिता, भाई और स्वयं इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। चौबे महराज का सियासी जीवन परिवारवाद की ही देन है। अब वे इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने पुत्र को राजनीति के क्षितिज का सितारा बनाने लालायित हो उठे हैं। उन्हें लगने लगा है कि दीपक बैज के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते उनकी दाल गलने वाली नहीं है, इसलिए वे भूपेश बघेल के कंधे पर बंदूक रखकर गोलियां दागने लगे हैं। इसके पीछे उनकी दोहरी मंशा है कि आदिवासी नेता दीपक बैज को किसी तरह हटा दिया जाए और भूपेश बघेल भी खुश और उन पर कृपावान बने रहें। घर के भेदिए का चेहरा लगातार बेनकाब होता जा रहा है और भूपेश बघेल की आंखों से भी पट्टी भी अब शायद जल्द हट जाएगी।

हालांकि रविन्द्र चौबे जी पिछले लोकसभा चुनाव में राजनांदगांव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चुनाव में विभीषण की भूमिका और रायपुर महापौर चुनाव में अपने रिश्तेदार चौबे को साथ देकर विभीषण बन चुके है यह बात सभी समझदार कांग्रेसी को मालूम भी है , अतः इस अध्यछ के रहते अपनी दाल नहीं गलते देख महराज ने अब अपनी कूटनीतिक पंडित की भूमिका का सहारा लेकर अपने को अब ऊपर लाने की कोशिश की है क्योंकि वह जानते है कि भूपेश बघेल उनको तवज्जो देंगे नहीं , अतः वे सहृदय आदिवासी अध्यछ को तिकड़म से अपना काम हेतु राजी करे, किंतु घर के भेदी लंका ढहाए की भूमिका में ही इनके पुराने साथी सामने आकर इनकी पुरानी नारद गिरी को समाप्त करने लग गए है

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