राजस्थान की लोकसंस्कृति में वीर तेजाजी महाराज को सर्प देवता और सच्चे लोकनायक के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्म तेजा दशमी के दिन, भाद्रपद शुक्ल पक्ष में हुआ था। वीर तेजाजी का जीवन साहस, न्याय और सत्यनिष्ठा की मिसाल है। वे न केवल एक योद्धा थे, बल्कि सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक भी थे।
तेजाजी को पशु और विशेष रूप से गायों की रक्षा करने वाले देवता के रूप में जाना जाता है। एक कथा के अनुसार उन्होंने एक घायल नाग से किया वचन निभाने के लिए मृत्यु का भी वरण किया, जिससे उनकी वचनबद्धता और वीरता का परिचय मिलता है। इसी वजह से उन्हें “नागराज” की उपाधि भी दी जाती है।
ग्रामीण भारत, खासकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में तेजाजी की बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा होती है। तेजा दशमी के दिन लोग सांप के काटे का इलाज भी तेजाजी के नाम से करते हैं।









