= पर्वों में धर्मप्रेमी युवाओं ने शुरू की शानदार पहल =
= धर्म और श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं युवक =
= प्रसाद के साथ व्यजनों का भी किया जा रहा वितरण =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों सनातन धर्म के संरक्षण के लिए और धर्म विरोधी तत्वों के खिलाफ अनूठी लहर चल पड़ी है। एक ओर जहां बस्तर संभाग के गांवों में कन्वर्जन के खिलाफ आदिवासी एकजुट हो गए हैं और कन्वर्जन कराने वाले तत्वों को गांवों में घुसने नहीं दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोगों को सनातन से जोड़े रखने के लिए पर्वों के दौरान प्रसाद के साथ खीर, खिचड़ी, मोदक लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, पोहा, कचौरी, आलूगुंडे समेत अन्य व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इस पहल से श्रद्धालुओं की सेवा और धर्म संस्कृति का संरक्षण हो रहा है। धार्मिक स्थलों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
सर्वविदित तथ्य है कि बस्तर संभाग और संभाग के सीमावर्ती जिलों के लिए नक्सलवाद के बाद कन्वर्जन दूसरी सबसे बड़ी समस्या है। आदिवासी समुदाय के साथ ही दूसरे समुदायों के गरीब तबके लोग भी बड़े पैमाने पर कन्वर्ट किए जा रहे हैं। प्रार्थना, चंगाई सभाओं के जरिए बीमारियां और समस्याएं दूर कराने के बहाने लोगों का कन्वर्जन धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऎसी गतिविधियों पर रोक लगाने आदिवासी समुदाय के शिक्षित एवं जागरूक तबके वर्ग ने मोर्चा खोल दिया है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के कई गांवों में कन्वर्जन कराने वाले लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। इस बाबत गांवों के बाहर बोर्ड लगाकर सख्त चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही अब सनातन धर्मप्रेमी जागरूक युवाओं में धर्म संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। इसकी बानगी बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले के फरसगांव इलाके के झाटीबन आलोर की पहाड़ी पर स्थित लिंगेश्वरी माता के दरबार और कांकेर लोकसभा क्षेत्र के दल्ली राजहरा में देखने को मिल रही है। लिंगेश्वरी माता का दरबार आज खुला, जहां धर्मप्रेमी रवि घोष ने हजारों श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी और जल की व्यवस्था की है।रवि घोष यह कदम सनातन धर्म के संरक्षण के लिए उठा रहे हैं।
यहां व्यंजनों का वितरण
दल्ली राजहरा के चिखलाकसा में अष्टविनायक गणेश उत्सव समिति बीते चार सालों से श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ तरह तरह के व्यंजन परोस कर उन्हें धर्म से जोड़े रखने की पहल कर रही है। कम समय मे ही समिति सदस्यों की मेहनत से समिति ने अपनी अलग पहचान बनाई है। समिति प्रतिदिन विविध प्रकार के प्रसाद और व्यंजन वितरण के लिए चर्चित हो चुकी है। समिति द्वारा इस साल छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया जा रहा है और पंडाल में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पोहा, खीर, चिवड़ा, आलू गुंडे, मोदक, मोती चूर के लड्डू जैसे विविध प्रकार के व्यंजन प्रसाद स्वरूप वितरित किए जा रहे हैं। गणेशोसव समिति सदस्य दिगंत माथुर और हितेश पटेल ने बताया कि इसके अलावा हर साल विशाल भंडारे का भी आयोजन समिति द्वारा किया है। लगभग 4 हजार श्रद्धालु भंडारे का लाभ लेते हैं। दिगंत और हितेश ने बताया कि सनातन के संरक्षण के लिए उनकी समिति यह पहल करती है।









