लखनपुर संवाददाता विकास अग्रवाल।
अंबिकापुर सरगुजा।।
अंबिकापुर/बलरामपुर जिले में खस्ता हाल सड़क को शिक्षकगणों ने अपनी मेहनत और श्रमदान से दुरुस्त कर चलने योग्य बनाया। यह कार्य समाज और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया, किंतु शासन-प्रशासन ने इसे गलत ठहराते हुए संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया। यह कदम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शिक्षकों के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है। क्या भाजपा सरकार का सुशासन यही है? दो दिन बाद ही शिक्षक दिवस मनाया जाना है। ऐसे अवसर पर जहाँ श्रमदान करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाना चाहिए था, वहीं प्रशासनिक दबाव में नोटिस थमाना शिक्षकों के आत्मसम्मान के विपरीत है। शासन को सोचना चाहिए कि जर्जर सड़कों की मरम्मत न कर पाने पर आत्ममंथन करे, न कि श्रमदान करने वाले शिक्षकों को दोषी ठहराए।यह केवल बलरामपुर ही नहीं, पूरे संभाग के शिक्षकों की गरिमा का प्रश्न है। अतः शासन-प्रशासन से मांग की जाती है कि शिक्षकों को जारी नोटिस तत्काल वापस लिया जाए। श्रमदान कर सड़क दुरुस्त करने वाले शिक्षकों को 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाए।इससे शिक्षकों के सम्मान की रक्षा होगी और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
परवेज आलम गांधी
प्रदेश महासचिव
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी,अल्पसंख्यक विभाग









