सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग तीन दिनों के भारत दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और कई मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई इस बात की जानकारी सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने दी।
उन्होंने बताया, “रक्षा सहयोग को भी द्विपक्षीय साझेदारी के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया गया। तीनों सेनाओं सहित दोनों पक्षों के बीच आदान-प्रदान और प्रशिक्षण सहयोग के साथ-साथ सहभागिता को और बढ़ाने पर सहमति हुई। रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी सहमति हुई। हमारे सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आसियान के साथ भारत के संबंधों पर भी चर्चा की और सिंगापुर हमेशा से भारत की एक्ट-ईस्ट नीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।”
पी कुमारन ने कहा, “पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान हमने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया था। इस समझौता ज्ञापन के तहत, हमने एक द्विपक्षीय सेमीकंडक्टर नीति वार्ता स्थापित की है और दोनों पक्ष भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए निवेश, व्यापार-से-व्यापार संबंध, कौशल विकास और अनुसंधान एवं विकास पर काम कर रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में यह सहयोग का एक बहुत ही आशाजनक क्षेत्र बन जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “हरित और डिजिटल शिपिंग कॉरिडोर पर संपन्न समझौता ज्ञापन शून्य-उत्सर्जन ईंधन आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग को सुगम बनाएगा और हमारे समुद्री उद्योगों को इस समझौते से लाभ होगा। हमने आज डिजिटल परिसंपत्ति नवाचार पर भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया, जो हमारे आरबीआई और सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण के बीच डिजिटल क्षेत्र में केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं सहित, सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इसरो ने पहले 18 सिंगापुरी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है और आज आदान-प्रदान किए गए समझौता ज्ञापन के साथ, हम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष स्टार्टअप के क्षेत्रों में आगे सहयोग के लिए काम करेंगे।”









