अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह दिन दो प्रमुख धार्मिक भावनाओं का संगम होता है—एक ओर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा, और दूसरी ओर गणेश उत्सव का समापन, जिसमें गणपति बप्पा का भावपूर्ण विसर्जन होता है।
अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु अनंत भगवान की पूजा करते हैं और ‘अनंत सूत्र’ (एक पवित्र धागा) बांधते हैं, जो जीवन में सुख, समृद्धि और अनंत कृपा का प्रतीक होता है। इस व्रत को करने से परिवार में समृद्धि और शांति बनी रहती है।
गणेश उत्सव के दसवें दिन इसी तिथि पर गणपति बप्पा का विसर्जन बड़े धूमधाम और जयघोष के साथ किया जाता है—“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!” भक्तजन गाजे-बाजे के साथ बप्पा को विदा करते हैं, साथ ही अगले वर्ष पुनः उनके आगमन की कामना करते हैं।
यह पर्व हमें जीवन में श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की भावना के साथ-साथ अनित्य संसार में अनंत ईश्वर की उपासना का संदेश देता है।









