आज 07 सितंबर 2025 को चंद्रग्रहण और पितृपक्ष की शुरुआत एक साथ हो रही है — एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग माना जाता है ।
ग्रहण समय (सूतक काल):
ग्रहण की शुरुआत रात 9:58 बजे IST से होती है, इसका चरम 11:41–11:42 बजे तक रहेगा, और समाप्त होगा रात 1:26 बजे (08 सितंबर) पर ।
सुत्क काल (सुगुण-उपासना हेतु अवरोधित अवधि) ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व, यानी आज दोपहर 12:57–12:59 बजे से शुरू हुआ और ग्रहण समाप्ति (रात 1:26) तक जारी रहेगा ।
ज्योतिष-वैदिक गहन दृष्टिकोण — क्या करें और क्या न करें
करने योग्य महत्वपूर्ण कार्य:
सत्कर्म और पूजा:
सुत्क काल से पूर्व पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म, पितरों के लिए जल और भोग अर्पण अवश्य करें ।
चौबीस घंटे में पूजा-उपासना:
ग्रहण के दौरान ध्यान, कीर्तन, मंत्र जाप (जैसे “ॐ नमो नारायणाय”, “ॐ नमः शिवाय”) करें, और ग्रहण के आरंभ/अन्त के समय स्नान व पूजा करना शुभ फलदायी है ।
दान-पुण्य:
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर, पवित्र जल (गंगा जल) से घर की पूजा करें और राशि अनुसार निम्न वस्तुओं का दान करें:
मेष/वृश्चिक: लाल वस्तुएँ (दाल, गुड़, चना)
वृषभ/तुला: सफेद (दूध, दही, घी)
मिथुन/कन्या: हरी वस्तुएँ
कर्क: चावल, चीनी, दूध-मिठाई
सिंह/धनु/मीन: पीली वस्तुएँ
मकर/कुंभ: काली वस्तुएँ (काले तिल, उड़द, काले वस्त्र) ।
ध्यान, साधना, आत्मविश्लेषण:
इस दिन की ऊर्जा को आत्म-पूजा, ध्यान और भाव-विश्लेषण के माध्यम से 활용 करना फलदायी है ।
न करने योग्य कार्य:
सूतक काल (दोपहर 12:57–रात 1:26 तक):
इस अवधि में खाना पकाना, भोजन, धार्मिक कार्य, शुभ शुरुआत, नए कार्य, विवाह, यात्रा आदि से बचें ।
पितृपक्ष के प्रारंभ में इन 6 कामों से परहेज:
मांसाहार, बाल/नाखून काटना, झूठ बोलना, वाद-विवाद या क्रोध, पीपल वृक्ष को नुकसान, तथा कोई भी शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित है ।
विशेष सावधानियां:
गर्भवती महिलाएं विशेष सतर्क रहें — मेकअप, बाहर जाना, रसोई कार्य, अधिक शारीरिक काम आदि से बचें ।
ज्योतिष अनुसार संभावित प्रभाव
यह ग्रहण पितृपक्ष की शुरुआत में होने वाला दुर्लभ संयोजन है, जो पूर्वजों की आत्माओं के लिए अत्यंत प्रभावशाली और उत्तरोत्तर कृपादायक माना जाता है ।
भावनात्मक, मानसिक परावर्तन:
ग्रहण स्थितियों से मानसिक तनाव, भ्रम, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें, और संबंधों में परिवर्तन संभव हैं — विशेषकर यदि आपकी राशि या जन्म-नक्षत्र ग्रहण से प्रभावित हो ।
कार्मिक ऊर्जा प्रवाह:
ऐसा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माना जाता है कि इस दिन किए गए पितृ तर्पण और साधनाएं पूर्वजो के साथ आपके karmic संबंध को सशक्त बनाती हैं, जिससे आशीर्वाद, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है ।
शांत और नवचेतना:
यह समय आत्म-सुधार, भावनात्मक शुद्धि, और जीवन के नए अध्याय हेतु अनुकूल माना जाता है — ग्रहण का प्रभाव ऊर्जा में बदलाव लाता है और कई राशियों के लिए सकारात्मक अवसरों की ओर ले जाता है ।
निष्कर्ष: आज का दिन चंद्रग्रहण + पितृपक्ष प्रथम दिन — अत्यंत आध्यात्मिक और प्रभावशाली है। इस समय का सदुपयोग, पवित्र साधना, पूर्वजों का सम्मान, दान-पुण्य, और संयम आपको और आपके परिवार को दिव्य आशीर्वाद एवं आंतरिक शांति प्रदान कर सकता है।









