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राजनीतिक दबाव में शिक्षा विभाग की मनमानी

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प्राचार्य चक्रपाल तिवारी के साथ नाइंसाफी — तीन साल से भुगत रहे मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना

राजेन्द्र प्रसाद जइसवाल की विशेष रिपोर्ट

जिला जांजगीर-चांपा

शिक्षा विभाग में राजनीतिक दबाव और अफसरशाही का ऐसा खेल चल रहा है कि योग्य शिक्षक भी अन्याय और प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। मामला स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय क्रमांक 01, जांजगीर के प्राचार्य श्री चक्रपाल तिवारी (व्याख्याता एल.बी.) से जुड़ा है, जो बीते तीन वर्षों से विभागीय साज़िश और राजनीतिक हस्तक्षेप का सामना कर रहे हैं।

जांच प्रतिवेदन में नियमों की अनदेखी

एस.डी.एम. जांजगीर द्वारा राजनीतिक दबाव में तैयार प्रतिवेदन।

न तो तिवारी को शोकॉज नोटिस दिया गया, न ही पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर।

जिस कार्य के लिए दोषी ठहराया गया, उस पर कोई लिखित आदेश ही मौजूद नहीं।

मनमाना स्थानांतरण आदेश

जिला शिक्षा अधिकारी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सेमरा (नवागढ़) में भेजने का आदेश जारी किया।

तिवारी ने हाईकोर्ट से स्टे आदेश प्राप्त कर लिया और पुनः जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ हुए।

बावजूद इसके, कार्यालयीन कार्य सौंपने से वंचित रखा गया।

विद्यालय के लिए निजी खर्च — भुगतान अभी तक लंबित

तिवारी ने बच्चों के लिए फर्नीचर, टेबल-कुर्सी, स्लोगन पेंटिंग, टिन-तालपत्री आदि निजी खर्च से उपलब्ध कराए।

कुल खर्च: ₹2,22,000 (दो लाख बाइस हजार रुपए)।

तीन-तीन जिला शिक्षा अधिकारियों ने प्रतिवेदन भेजा, पर भुगतान आज तक नहीं हुआ।

वर्तमान प्रभारी प्राचार्य श्रीमती बैसाखी परिया भी भुगतान कराने में असमर्थ।

सरकारी आदेश की भी अनदेखी

राज्य शासन ने संलग्नीकरण (Attachment) समाप्त करने का आदेश दिया।

इसके बावजूद जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी चुप्पी साधे हुए।

यह शासन आदेशों की सीधी अवहेलना है।

शिक्षकों का मनोबल गिराने वाला कृत्य

यदि ईमानदार और विद्यालय के उत्थान हेतु निजी खर्च करने वाले प्राचार्य को भी इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो यह न केवल न्याय का हनन है बल्कि जिले की शिक्षा व्यवस्था को भी गिरावट की ओर धकेलेगा।

जनहित की मांग

शासन-प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे।

प्राचार्य चक्रपाल तिवारी को न्याय दिलाया जाए।

लंबित ₹2.22 लाख की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि राजनीतिक दबाव में लिए गए निर्णयों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो शिक्षा विभाग की साख और जिले की शिक्षा व्यवस्था दोनों गहरी चोट खाएँगी।

अश्वनी कुमार भारद्वाज कहना कि किसी प्रकार कार्य चक्रपाल तिवारी को नहीं सौंपा गया और उन्होंने कोर्ट केश किया सेमरा नहीं जाने का तो न्यायालय में अभी प्रकरण लंबित है जैसे निर्णय आते उसका परिपालन किया जायेगा

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