रवि परिहार संवाददाता रतनपुर
नवरात्रि महोत्सव के लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा विशेष तैयारी की जा रही है।श्रद्धालुओं के विश्राम और भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है।
छत्तीसगढ़ के एकमात्र मंगला गौरी मंदिर बिलासपुर जिले के रतनपुर नगर के ग्राम पोड़ी में स्थित है। मंदिर के देवी विग्रह का प्राण प्रतिष्ठा गोवर्धन मठ के शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी निश्चलानंद जी सरस्वती महाराज के करकमलों से हुआ है। इस मंदिर में देवी का श्री विग्रह अद्भुत और अलौकिक है। माताजी नंदी वृषभ में आरूढ़ है तथा माताजी के गोद में श्री गणेश भगवान विराजित है जिसे माता जी ने एक हाथ से थाम रखा है और माताजी की एक हाथ वर मुद्रा में है। माता का यह स्वरूप अखण्ड सुहाग और संतान प्राप्त के कृपा को प्रदर्शित करता है।
मंदिर परिसर के प्रथम तल पर आदि गुरु शंकराचार्य भगवान का भक्ति मंदिर स्थापित है यह पूरे देश का प्रथम आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर है। आदि शंकराचार्य ने ही भारत देश में सनातन धर्म की पुनः स्थापना कर चार पीठ तथा चार धाम बनाए हैं। आदि शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है।
मंदिर की बाई और भाई और श्री चंद मलेश्वर महादेव का भव्य मंदिर स्थापित यह भी छत्तीसगढ़ का इकलौता चंद्र मलेश्वर महादेव मंदिर है। चंद्र मौलीश्वर महादेव की पूजा किसी भी समय की जा सकती है। पुराणों में वर्णित है कि माता पार्वती जी की आग्रह पर भोलेनाथ में अपना यह स्वरूप माता जी को दिखाया था यह स्वरूप भगवान के विवाह के समय का है जिसे माताजी ने कहा यह स्वरूप अब किसी को ना दिखाएं। श्री चंद्रमौलीश्वर महादेव समस्त शंकराचार्य के आराध्य देव होते हैं।
मंदिर के दाई ओर यज्ञ शाला स्थापित है जहा दोनो अष्टमी, पूर्णिमा वा अमावस्या में हवन किया जाता है।
श्री मंगलागौरी मन्दिर धाम के श्री महंत दैवज्ञ रमेश शर्मा ने बताया कि मंदिर के सभा गृह में श्री दुर्गा सप्तशती के 108 पाठ सभी नवरात्रि पर्व में कराए जाते है। देश विदेश के श्रद्धालुओं के मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। प्रतिदिन चंडी यज्ञ किया जाता है और रात्रि में माता सेवा जस गीत प्रतियोगिता का आयोजन होता है जिसमे अनेक गायन मंडली भाग लेते हैं। मन्दिर धाम में ज्वारा भी स्थापित भी किए जाते है। इनसभी कार्यकमो में श्रद्धालु लोग भाग ले सकते हैं।
मंगल शान्ति और संतान सुख का वरदान केन्द्र
श्रीमहंत शर्मा के अनुसार छत्तीस गढ़ में मंगलागौरी के एक मात्र मंदिर होने से वर्ष भर मंगलिक कन्या और युवकों का मंगलिक पूजा होता है। अभी तक एक हजार से अधिक मंगलिक पूजा कराई गई है जो छत्तीस गढ़ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। नवरात्रि पर्व पर मंगलिक कन्या व युवकों को विशेष पूजा भी कराई जाएगी।










