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बलिदान और साधना की दो मिसालें: जतिंद्र नाथ दास और स्वामी ब्रह्मानंद लोधी जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

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13 सितंबर का दिन भारतीय इतिहास में त्याग, तपस्या और बलिदान की प्रेरक कहानियों के रूप में याद किया जाता है। आज के दिन हम दो महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं — क्रांतिकारी जतिंद्र नाथ दास और तपस्वी संत स्वामी ब्रह्मानंद लोधी जी।

जतिंद्र नाथ दास (1904–1929)
जतिंद्र नाथ दास स्वतंत्रता संग्राम के उन महान सेनानियों में से एक थे जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। भगत सिंह के साथ जेल में रहते हुए उन्होंने अन्यायपूर्ण जेल-प्रणाली के खिलाफ भूख हड़ताल की। 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद 13 सितंबर 1929 को उन्होंने दम तोड़ दिया, लेकिन उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमिट छाप छोड़ गया। उनका बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है कि देश के लिए कुछ भी किया जा सकता है।

स्वामी ब्रह्मानंद लोधी जी
स्वामी ब्रह्मानंद लोधी जी एक अध्यात्मिक संत और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना जीवन सेवा, साधना और सामाजिक upliftment के लिए समर्पित किया। उन्होंने शिक्षा, नैतिकता और अध्यात्म के माध्यम से समाज को दिशा दी। उनका जीवन संयम, समर्पण और सेवा का प्रतीक था। उन्होंने न केवल आध्यात्मिक जागरण फैलाया बल्कि गरीबों और वंचितों के उत्थान के लिए भी कार्य किया।

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