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ओजोन परत: प्रकृति की ढाल, संरक्षण है हमारी ज़िम्मेदारी

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16 सितंबर को हर साल विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है, जो हमें ओजोन परत के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता की याद दिलाता है। यह दिन 1987 में हस्ताक्षरित मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की वर्षगांठ के रूप में भी मनाया जाता है, जो ओजोन परत को क्षति पहुंचाने वाले रसायनों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक वैश्विक समझौता था।

ओजोन परत क्या है?
ओजोन परत पृथ्वी के समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित है और यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV rays) को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से रोकती है। यदि यह परत न हो, तो मनुष्यों, पशुओं, पौधों और समुद्री जीवन को गहरे नुकसान हो सकते हैं।

क्यों है इसका संरक्षण जरूरी?
– UV किरणें त्वचा कैंसर और आंखों की बीमारियों को बढ़ा सकती हैं।
– ये फसलों और वनस्पति जीवन को नुकसान पहुंचाती हैं।
– समुद्री जीवन, खासकर प्लवक (plankton), जो समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार है, प्रभावित होता है।

क्या हुआ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से?
इस वैश्विक समझौते के तहत दुनिया भर के देशों ने CFCs जैसे रसायनों पर रोक लगाई, जिससे ओजोन परत को क्षति होती थी। यह समझौता अब तक का सबसे सफल पर्यावरणीय प्रयास माना जाता है, जिससे ओजोन परत में रिकवरी के संकेत मिलने लगे हैं।

हम क्या कर सकते हैं?
– एयर कंडीशनर, फ्रिज आदि खरीदते समय CFC फ्री उत्पादों का चयन करें।

– कारपूल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साइकिलिंग को अपनाएं।
– प्लास्टिक और एयरोसोल स्प्रे का सीमित उपयोग करें।
– लोगों को जागरूक करें।

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