पंडित विष्णु नारायण भातखंडे, भारतीय शास्त्रीय संगीत के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने हिंदुस्तानी संगीत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यवस्थित शिक्षण प्रणाली प्रदान की। हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर संगीत जगत उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके योगदान को स्मरण करता है।
भातखंडे जी ने रागों का वर्गीकरण कर उन्हें थाट पद्धति के तहत सरल और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संगीत को केवल परंपरा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे संस्थागत शिक्षा से जोड़ा। उनके द्वारा स्थापित ‘मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक’, लखनऊ, आज भी उनके कार्यों का जीवंत प्रमाण है।
उनकी प्रमुख रचनाएं — “हिंदुस्तानी संगीत पद्धति”, “कर्मीबद्ध पद्धति” और “राग संग्रह” — आज भी संगीत विद्यार्थियों के लिए आधार स्तंभ हैं। उन्होंने रागों को समझने के लिए एक आसान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जिससे आम जनमानस तक संगीत की पहुंच संभव हो पाई।
इस पुण्यतिथि पर हम सभी उनके समर्पण, ज्ञान और संगीत को जन-जन तक पहुंचाने की भावना को नमन करते हैं। पंडित भातखंडे का जीवन हर संगीत साधक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।









