जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेंद्र प्रसाद जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा।
बरसात का मौसम आते ही प्रदेश सरकार ने सभी रेत घाटों पर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। बावजूद इसके, जिला जांजगीर-चांपा के बलौदा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत महुदा में अवैध रेत खनन अपने चरम पर है। धनवार पारा और डोंगा घाट से प्रतिदिन 200 से 300 ट्रैक्टरों में खुलेआम रेत की ढुलाई हो रही है। यह न केवल शासन के आदेशों की अवहेलना है बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों की नाराजगी और खतरे की घंटी
ग्राम पंचायत महुदा के ग्रामीणों ने इस अवैध गतिविधि पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि खनन के चलते नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और आने वाले समय में बाढ़ एवं जल संकट जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह का अंधाधुंध खनन नदियों की जीवनरेखा को खत्म कर देगा।
उप सरपंच का खुलासा
महुदा पंचायत के उप सरपंच ने भी स्पष्ट कहा कि घाट से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर रेत लेकर निकलते हैं और प्रशासनिक स्तर पर कोई रोक-टोक नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि स्थानीय तंत्र या तो खनन माफियाओं के दबाव में है या मिलीभगत कर रहा है।

खनिज विभाग की लापरवाही
खनिज अधिकारी अनिल साहू से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि “महुदा पंचायत में पिछले दो दिनों से कोई ट्रैक्टर नहीं भेजा गया है और अवैध खनन की जानकारी विभाग को नहीं है।” यह बयान वास्तविक हालात से बिल्कुल मेल नहीं खाता। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन ट्रैक्टरों की लंबी कतार घाट से गुजरती है। इससे विभाग की लापरवाही और उदासीनता साफ झलकती है।
कलेक्टर का सख्त रुख लेकिन…
जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा है कि अवैध रेत खनन की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जांच कर कठोर कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। सवाल यह उठता है कि जब कलेक्टर स्वयं इतने सख्त निर्देश दे रहे हैं तो फिर जमीनी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही?
शासन-प्रशासन की साख दांव पर
महुदा पंचायत में हो रहा अवैध रेत खनन शासन के आदेशों की खुली अवहेलना है। यह सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की लूट नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की कमजोरी और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। यदि इस पर समय रहते ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या भविष्य में और भयावह रूप ले सकती है।
महुदा पंचायत की यह स्थिति बताती है कि रेत माफिया किस तरह शासन के आदेशों और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद बेलगाम हो चुके
महुदा पंचायत की यह स्थिति बताती है कि रेत माफिया किस तरह शासन के आदेशों और प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद बेलगाम हो चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण और पर्यावरण इन खनन माफियाओं की मनमानी का खामियाजा भुगतते रहेंगे? शासन-प्रशासन को अब “सख्त कार्रवाई” के दावे से आगे बढ़कर जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे।









