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छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन योजना बना भ्रष्टाचार का गढ़, ठेकेदार एवं पी एच ई विभाग ने किया भरतपुर में मोदी की गारंटी को फेल

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हनुमान प्रसाद यादव
 छत्तीसगढ़: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस संकल्प को मूर्त रूप देने में फेल हो रही है।
प्रत्येक ग्रामीण परिवार को शुद्ध पेयजल के लिए घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना है। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों में काम लायक नल कनेक्शन प्रदाय कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है।
एमसीबी जिले के विकासखंड भरतपुर के अधिकतर ग्राम पंचायतों  भागीरथी जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजना संचालित अभी तक नहीं हो पाई है। यहां तक कि हर घर  टंकी से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। गांव के लोग इंतजार में हैं ।परंतु अभी तक टंकी को सौर ऊर्जा पैनल से कनेक्शन  नहीं जुडा़  है, जिससे ग्राम पंचायत को सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित अभी तक नहीं हो पायी है।
ग्रामीणों का कहना है  कि “ हर घर में नल से पानी पहुंचने की बात कब से कहीं जा रही है। परंतु यह सिर्फ आश्वासन ही दिखता नजर आ रहा है।
  ग्रामीणों का कहना है कि पीने के पानी के लिए हमें आज भी हैंडपंप और कुओं पर निर्भर है, जिसमें काफी  परेशानियां के साथ, हमें  समय और मेहनत आज भी करना पड़ रहा है।
 शासन सिर्फ आश्वासन और वादे कर रही है कि  नल से पानी मिलने से  शारीरिक थकान से मुक्ति मिलेगी। और समय की बचत भी होगी है। और    घर बैठे ही पीने और खाना पकाने के लिए शुद्ध पानी मिलेगा। इससे जीवन बहुत आसान हो जाएगा।
 परंतु  इसे आसान न होने का कारण प्रशासनिक लापरवाही,  विभागीय संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों और पी एच ई विभाग की मिली भगत से यह योजना सिर्फ कागज में सिमट कर रह गई। और इस योजना से  भरतपुर के ग्रामीण  ठगी महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है  कि गर्मियों में जल स्तर नीचे चले जाने से हैंडपंप और कुओं से पानी लाना कठिन हो जाता है। बरसात के मौसम में दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
लेकिन शासन द्वारा नल जल योजना से शुद्ध जल उपलब्ध कराने की बात की संकल्प भी ली गई थी, लेकिन भ्रष्टाचार से सनलिप्त अधिकारियों के वजह से आज भी इस परेशानी के साथ जीवन यापन करना पड़ रहा है वनांचल क्षेत्र में आज भी नल जल योजना के आज भी कार्य  आधा अधूरे पडे़ हैं। जिसे देखने के लिए न तो शासन न प्रशासन की आंखे  इस योजना के कार्यो पड़ रही है। जिससे तीन वर्षों से  टंकी, नल कनेक्शन गांव में अधूरे पड़े हैं।  सिर्फ टोटी बनाकर कार्य को पूर्णता दिखाते हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में कई सरपंचों/ सचिवों से कार्य पूर्णता पर दस्खक करा लिया गया है। और कार्य आज भी धरातल पर जस का तस पड़ा है।
वही  प्रशासन झूठा आश्वासन देते हुए बता रहा है कि प्रत्येक घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रही है, कि पानी की नियमित जाँच हो रही है।
शासन  प्रत्येक घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध  कराने की बात कर रही है। परंतु यहां के भ्रष्टाचारियों के वजह से शासन की योजनाओं का संपूर्ण लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं पहुंच रही है। इसके परिणामस्वरूप जलजनित बीमारियों से आज भी लोग ग्रसित हैं।
 ग्रामीणों का कहना है कि नल जल योजना से शुद्ध पेयजल कब उपलब्ध होगा। इस योजना को संचालित हुए 5 वर्ष पूर्ण हो गए परंतु आज तक हर घर पानी नहीं पहुंच पाया है शासन की योजना सिर्फ टोटी बनकर रह गया है।
हम बता दें कि  विकासखंड भरतपुर में नल जल योजना पूर्ण रूप से फेल है। वजह  इसके फेल होने का मुख्य कारण संबंधित कार्यों का ठेकेदार एवं   विभागीय अम्लों के मिली भगत से,भरतपुर में  नल जल योजना चढ़ा भ्रष्टाचार का भेंट, जिम्मेदार आज तक नहीं पहुंचे, क्षेत्र के निरीक्षण करने , जिससे भ्रष्टाचारियों हौसला आज भी बलंद है। और कार्यों में लापरवाही बर्ती  जा रही है।
अब देखना होगा कि शासन प्रशासन नल जल योजना में हुए भ्रष्टाचार का  गांवों में जांच करने पहुंचती है,और इस योजना को सफल बनाने का प्रयास करती है‌। या फिर क्षेत्र में चल रही नल जल योजना की राशि का बंदर बांट कागजों तक ही सीमित रहेगा। नल जल योजना में चल रहे भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही होगी या फिर, ठेकेदार और अधिकारी फलते, फूलते रहेगें।

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