Home धर्म व त्यौहार नवरात्रि का दूसरा दिन: माता ब्रह्मचारिणी की उपासना

नवरात्रि का दूसरा दिन: माता ब्रह्मचारिणी की उपासना

52
0
शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु मां की आराधना कर आत्मसंयम, तप और साधना का वरदान पाते हैं। माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत दिव्य एवं तपस्विनी है। उनके हाथ में जप की माला और कमंडल शोभा पाते हैं, जो तप, श्रद्धा और संयम का प्रतीक है। माता ब्रह्मचारिणी का संबंध स्वाधिष्ठान चक्र से माना जाता है, जो तप, संयम और आत्मबल का प्रतीक है। इस चक्र के जागरण से साधक को मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
माता ब्रह्मचारिणी की उत्पत्ति कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष की पुत्री सती ने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया। इसी कठोर ब्रह्मचर्य और साधना के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। सैकड़ों वर्षों तक कठिन तपस्या कर उन्होंने शिव को पति रूप में प्राप्त किया। यही स्वरूप नवरात्रि के दूसरे दिन पूजे जाते हैं।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर के शुद्ध वस्त्र धारण करें।
माता ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और सफेद फूल अर्पित करें।
उन्हें शहद, मिश्री और पंचामृत प्रिय हैं, अतः उनका भोग लगाएं।
विशेष मंत्र “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” का जप करें।
माता को प्रसन्न करने का उपाय
मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को तप, संयम और सत्यनिष्ठा का पालन करना चाहिए।
उपवास और ध्यान करना।
घर में शांति बनाए रखना।
वृद्धों और गुरुओं का सम्मान करना।
जरूरतमंदों की सहायता करना।
इनसे मां शीघ्र प्रसन्न होकर भक्ति, मोक्ष और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
 नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए आत्मबल और संयम की साधना का प्रतीक है। जो भी भक्त श्रद्धा भाव से मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करते हैं, उनके जीवन में कभी भी धैर्य और आत्मविश्वास की कमी नहीं होती।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here