दीपक शर्मा/कोरबा-पाली।
पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव सीईओ के भारी- भरकम कमीशन की मांग से खासे परेशान है। किसी भी निर्माण कार्य के एवज में अधिकारी के 15 से 20 प्रतिशत की कमीशनखोरी ने ग्रामों के विकास में गुणवत्ता को हासिये पर रख दिया है। पीड़ित सरपंचों का कथन है कि हर काम मे कमीशन देना पड़ रहा है, मुहमांगी कमीशन न देने पर हर काम अटका दिया जाता है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जनता सेवा और गांव विकास के लिए सरपंच चुने गए है। हमे क्या पता था कि निर्माण कार्यों के स्टीमेट, टीएस व स्वीकृति के लिए अधिकारी को मोटी कमीशन देना होगा। इसके उपरांत जैसे तैसे काम पूरा कराओ तो गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की खरी- खोटी सुनने को मिलती है। ऐसे में 15- 20 प्रतिशत तय कमीशन सीईओ को देने के बाद भला कैसे प्राक्कलन के अनुरूप काम हो पाएगा। इसके अलावा खाते में वित्त आयोग की राशि जमा कराने भी सुविधा शुल्क देना पड़ रहा है, कमीशन न देने पर बुनियादी विकास के कार्य रुके हुए है और जनता घर आकर दोष दे रही है। गलती अधिकारी की और छवि हमारी खराब हो रही है। इससे अच्छा तो यह है कि इस्तीफा देकर घर बैठ जाऊं।
ज्ञात हो कि पाली सीईओ भूपेंद्र सोनवानी के भारी- भरकम कमीशनखोरी और मनमाने रवैये को लेकर पूर्व में सरपंचों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर उन्हें हटाने की मांग की थी। जिसके परिणामस्वरूप सीईओ को पाली जनपद से हटाकर जिला पंचायत के अधीन संलग्न कर दिया गया था। बाद में कमीशनबाज सीईओ अपना पदस्थापना पुनः पाली जनपद में कराने सफल रहे, और तब से लेकर अभी तक उनकी मनमर्जी रवैया चरम पर है। शीर्ष अधिकारियों द्वारा सरपंचों व जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर सीईओ के खिलाफ कोई कार्रवाई न किया जाना उनके हौसले को बुलंद करती है। यही वजह है सीईओ के मनमानीं व कमीशनखोरी से पाली जनपद के सरपंच- सचिव त्रस्त है। सरपंचों का कहना है कि ऐसे अधिकारी पर कार्रवाई की जाए ताकि कोई भी सरपंच या सचिव इनके मनमानीं का शिकार न बनने पाए और भारी- भरकम कमीशन देने मजबूर न हो।







