जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेंद्र प्रसाद जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा
जिले की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं छुटभैया नेता। चाहे कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा, दोनों ही दलों में कुछ छोटे-मोटे नेता अपने आपको बड़ा साबित करने की होड़ में गरीब और कमजोर तबके के लोगों पर दबदबा बनाने से भी नहीं चूक रहे।
इन नेताओं की हरकतें न केवल पार्टी की गरिमा को चोट पहुँचा रही हैं बल्कि वरिष्ठ नेताओं की छवि भी खराब कर रही हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि असली नेता जनता के लिए काम करने के बजाय केवल अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
बाहरी छुटभैया नेता भी सक्रिय
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब बाहरी छुटभैया नेता जिले में प्रवेश कर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करने लगते हैं। स्थानीय स्तर पर जनता से कोई जुड़ाव न होते हुए भी ये नेता रोब झाड़ते हैं और पार्टी संगठन को अस्थिर करते हैं।
शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी
अब समय आ गया है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के बड़े नेता कठोर कदम उठाएँ। छुटभैया नेताओं की पहचान कर उन्हें तत्काल बाहर का रास्ता दिखाना जरूरी है। तभी जनता से चुनकर आए असली प्रतिनिधि अपने क्षेत्र और जनता के हित में सोच-समझकर फैसले ले पाएँगे।
यदि समय रहते इन छुटभैया नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जिले की राजनीति का स्तर और नीचे गिर सकता
यदि समय रहते इन छुटभैया नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जिले की राजनीति का स्तर और नीचे गिर सकता है। दोनों दलों को यह समझना होगा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए कठोर अनुशासन और स्पष्ट कार्यवाही ही एकमात्र रास्ता है







