नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित होता है। माँ दुर्गा का यह रूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। माँ कालरात्रि को अंधकार का नाश करने वाली देवी कहा जाता है, जो अपने भक्तों की सभी बाधाओं, कष्टों और भय को दूर करती हैं।
माना जाता है कि माँ कालरात्रि की आराधना से जीवन में छिपे हुए शत्रु नष्ट होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का अंत होता है। उनका रूप भले ही डरावना हो, लेकिन वे अपने भक्तों को अभय और रक्षा का आशीर्वाद देती हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप:
माँ का रंग अंधकार की तरह काला है, उनके बाल बिखरे हुए हैं और गर्दन में बिजली की तरह चमकती माला होती है। चार भुजाओं वाली मां अपने हाथों में तलवार और लौह हथियार धारण करती हैं। उनका वाहन गधा है।
पूजा विधि:
सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने से पहले स्थान को शुद्ध किया जाता है। मां को गुड़ और काले तिल का भोग अर्पित किया जाता है। रात्रि पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
महत्व:
ऐसा माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से माँ कालरात्रि की पूजा करते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की काली शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा प्रभावित नहीं कर सकती। माँ कालरात्रि का आशीर्वाद मिलने से जीवन में साहस, आत्मबल और मानसिक शक्ति का विकास होता है।









