रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। शहर में सरोरा रोड चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान सोमवार को प्रशासन की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी रही। बताया जा रहा है कि इस कार्यवाही में कई मकान तोड़े गए, जबकि प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया था। अचानक कार्रवाई शुरू होने से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई गरीब परिवार इस क्षेत्र में वर्षों से रह रहे थे। जब बुलडोजर उनके घरों तक पहुंचा, तो लोग अपने बच्चों, मवेशियों और घरेलू सामान को बचाने में व्यस्त हो गए। कई परिवारों को सड़क किनारे बैठकर अपने बिखरे सामान और टूटे घरों के मलबे के बीच रोते और परेशान देखा गया।

प्रभावित महिलाओं ने बताया कि घर टूटने से वे अब खुले आसमान के नीचे आ गई हैं। कुछ लोग अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने में भी असफल रहे, जिससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। बच्चों और बुजुर्गों को मलबा हटाने के बीच पलायन करते देखना अत्यंत मार्मिक दृश्य था।
मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि प्रशासन यदि पहले से नोटिस जारी करता और परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करता, तो उन्हें इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। अचानक की गई कार्रवाई से सैकड़ों लोगों पर संकट आ खड़ा हुआ है।
हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से कहा गया है कि ये मकान सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आते थे और अवैध निर्माण माने जा रहे थे। इस दौरान लोगों की आपत्तियों को सुनने का कोई विशेष अवसर नहीं दिया गया।
इस घटना ने शहर में एक बार फिर विस्थापन और पुनर्वास की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा और पुनर्वास मुहैया कराया जाए।








