पापांकुशा एकादशी, आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत धर्म, पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायक माना गया है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अपने जीवन के समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और उसे मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
पौराणिक मान्यता व कथा:
पापांकुशा एकादशी के व्रत का उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है। इसके अनुसार, एक बार यमराज ने कहा था कि जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद उसे यमलोक नहीं जाना पड़ता। भगवान विष्णु की कृपा से वह सीधे मोक्ष को प्राप्त करता है।
एक कथा के अनुसार, एक बहेलिया जिसे अपने जीवन में कई पाप लगे थे, इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हुआ। उसके व्रत और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान ने उसके सभी पापों का अंत किया और उसे परम गति प्रदान की।
व्रत विधि:
– प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
– दिनभर उपवास रखें, फलाहार ले सकते हैं।
– भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करें।
– तुलसी पत्र, पंचामृत, दीप और भोग अर्पित करें।
– विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
– रात्रि जागरण करें और अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।
महत्व:
पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को न केवल पापों से छुटकारा मिलता है बल्कि उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। यह व्रत जीवन को शुद्ध, शांत और आध्यात्मिक बनाता है।









