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पाकिस्तान-भारत तनाव: पाक सेना ने चेतावनी दी — “यदि युद्ध हुआ तो तबाही व्यापक होगी”; दोनों पक्षों के कड़े वक्तव्यों से सीमा पर तनाव बढ़ा

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शनिवार (3–4 अक्टूबर 2025) को पाकिस्तान सेना ने कहा कि अगर अब भारत के साथ युद्ध छिड़ा तो परिणाम विनाशकारी होंगे और वे पलटकर भी बिना हिचकिचाहट जवाब देंगे। यह बयान तब आया जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर वह “राज्य-समर्थित आतंकवाद” नहीं रोकेगा तो उसे अपनी भू-स्थिति (map) पर बने रहने पर सवाल उठना चाहिए — और इस बार पिछले समय की तरह संयम नहीं दिखाया जाएगा।
क्या कहा गया — प्रमुख बिंदु
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 3 अक्टूबर को दिए बयानों में कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन बंद करना होगा, अन्यथा भारत पिछली बार की तरह संयम नहीं दिखाएगा। उन्होंने सैनिकों को सतर्क रहने और संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश भी दिए।
पाकिस्तान की ओर से रक्षा प्रवक्ता/इंटर-सर्विसिज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इन बयानों पर “गंभीर चिंता” जाहिर करते हुए कहा कि अगर हालात युद्धाकृति में बदलते हैं तो दोनों तरफ से भारी विनाश होगा और ऐसी सामान्य चेतावनियाँ क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा हैं। बयान में यह भी कहा गया कि “यदि स्थिति आई तो मिटाना पारस्परिक होगा” — यानी किसी के एकतरफा मिटाने की बात का जवाब दिया जाएगा।
पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम
पिछले कुछ महीनों में दोनों पड़ोसियों के बीच कड़वी बयानबाजी और सीमापार छोटे-छोटे घटनाक्रम की खबरें आई हैं। रक्षा और राजनीतिक स्तर के कटु बयानों के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव बढ़ा हुआ दिखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे शब्दिक आक्रोश से अशांति का जोखिम बढ़ता है और परमाणु-शक्ति वाले दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के सैन्य संधर्ष के दूरगामी और गंभीर परिणाम होंगे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान कथनों से वास्तविक सैन्य कदमों का अनिवार्य अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए, फिर भी दोनों पक्षों के कड़े रुख का असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ता है। किसी भी तरह की अस्थिरता को रोकने के लिए तेज़ कूटनीतिक संवाद और मध्यस्थ भूमिका आवश्यक बताई जा रही है।
सरकारों का फोकस — क्या आगे होगा
दोनों तरफ के उच्च सैन्य और राजनीतिक बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें तटीय और क्षेत्रीय सत्ता केन्द्रों पर टिकी हैं — खासकर तब जब कोई बयान प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के संकेत देता हो। फिलहाल फ़ील्ड पर किसी बड़ी सैन्य सक्रियता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है; परंतु मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों से स्पष्ट है कि वाक्यात्मक युद्धविराम टूटने से खतरा बना हुआ है।

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