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राष्ट्रीय डाक दिवस: भरोसे की डोर, भावनाओं की चिट्ठी

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हर साल 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल भारतीय डाक व्यवस्था की समृद्ध विरासत को सम्मानित करता है, बल्कि उन डाक कर्मचारियों के अथक प्रयासों को भी सराहता है जो देश के हर कोने में पत्रों, भावनाओं और सेवाओं को पहुंचाते हैं। यह दिवस विश्व डाक दिवस (9 अक्टूबर) के अगले दिन मनाया जाता है।

भारतीय डाक सेवा दुनिया की सबसे बड़ी डाक प्रणाली में से एक है, जिसकी नींव 1854 में लॉर्ड डलहौजी के समय रखी गई थी। समय के साथ डाक सेवा ने न केवल चिट्ठियों और मनी ऑर्डर जैसी पारंपरिक सेवाओं में उत्कृष्टता दिखाई, बल्कि स्पीड पोस्ट, ट्रैकिंग, और डिजिटल सेवाओं के साथ खुद को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा है।

राष्ट्रीय डाक दिवस हमें याद दिलाता है कि तकनीक के इस युग में भी डाक व्यवस्था आज भी गांव-गांव, शहर-शहर तक एक मजबूत संचार माध्यम बनी हुई है। आज भी दूर-दराज के इलाकों में भारतीय डाक ही वह साधन है, जिसके जरिए लोग बैंकिंग, पेंशन, आधार जैसी सेवाओं से जुड़े रहते हैं।

डाकघर सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि भावनाओं की वाहक है—जहां हर चिट्ठी में किसी की याद, प्रेम, चिंता या शुभकामनाएं छुपी होती हैं।

राष्ट्रीय डाक दिवस पर हमें न केवल इस व्यवस्था के प्रति सम्मान प्रकट करना चाहिए, बल्कि उसमें काम करने वाले हज़ारों कर्मचारियों के प्रति कृतज्ञता भी जतानी चाहिए जो हर मौसम, हर परिस्थिति में अपनी सेवा निष्ठा से डाक व्यवस्था को ज़िंदा रखते हैं।

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