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सूरज की “रौशनी” में भी भ्रष्टाचार!

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 बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
= गांवों में स्थापित सोलर पैनल्स और लाइटें खराब =
= पहले लगाए घटिया सामान, अब पार्ट्स न होने का रोना रो रहा है विभाग =
=सोलर लाईट के नाम पर बस्तर में जमकर भ्रष्टाचार =

जगदलपुर। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने की जमकर कवायद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस पहल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, उस विभाग के अधिकारी योजना का बेड़ागर्क करने पर आमादा हैं। बस्तर जिले के लगभग सभी ब्लॉकों के गांवों में लगाई गई हाई मास्ट सोलर लाइटें उजाला फैलाने में नाकाम साबित हो रही हैं।शो पीस बन चुकी इन लाइटों और सोलर पैनल की मरम्मत अधिकारी नहीं करा रहे हैं। सोलर पैनल और सोलर लाइटें लगाने की जिम्मेदारी जिस ठेकेदार को दी गई थी, उसने अधिकारियों के संरक्षण में निहायत ही घटिया स्तर के सोलर पैनल्स और लाइटें लगवाई हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि माह भर में ही हर गांव में सिस्टम बैठ गया है। इसे लेकर अब ग्रामीणों में आक्रोश उभरने लगा है।
सोलर पैनल्स और लाइटें लगाने के नाम पर महज खानापूर्ति करने वाले ठेकेदार को अब ग्रामीण खोज रहे हैं। साथ ही साथ उक्त विभाग के एसडीओ नीलप्रकाश भी अब तक इन कीमती सोलर लाइटों की देखरेख के बारे में ग्रामीणों को सही जवाब नहीं दे पा रहे हैं। बस्तर के लगभग सभी गांवों की सोलर लाइटें खराब हो चुकी हैं और देखरेख के अभाव में पैनल्स और लाइटें कबाड़ बनती जा रही हैं। ग्राम नानगुर में लगी सभी सोलर लाइटें खराब हो चुकी हैं। यहां के बीजेपी नेता और उप सरपंच महेंद्र सेठिया ने बताया कि सोलर पैनल्स और लाइट की रिपेयरिंग हेतु कई बार विभाग से निवेदन किया गया। वहां से सिर्फ यही जवाब मिलता है कि सामान नहीं है। श्री सेठिया ने बताया कि गांव की सड़कों और गलियों के अंधेरे में डूबे रहने से अप्रिय घटनाएं हो रही हैं। भाजपा नेता महेंद्र सेठिया का आरोप है कि इससे जुड़े अधिकारी और ठेकेदार योजना के क्रियान्वयन के नाम पर सरकारी रकम निकाल रहे हैं। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत सोलर लाइट के कार्य को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि बिना काम कराए ही केंद्रीय मद के करोड़ों रुपए डकार लिए गए, ग्राम पंचायतों से संतुष्टि प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए गए हैं। जबकि पंचायत प्रतिनिधियों को इस बारे में कोई जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान पंचायतों के माध्यम से पूर्व में कराए गए स्ट्रीट लाइट कार्यों को ही प्रधानमंत्री उत्कृष्ट एवं आदर्श ग्राम योजना के तहत कराए गए नए काम के रूप में दिखाया गया है। जब इस मामले में जानकारी लेने के लिए विभागीय एसडीओ नीलप्रकाश से सवाल किया गया तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वे इस विषय पर अधिकृत नहीं हैं। इसी तरह जब रायपुर ईई से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने भी यही जवाब दिया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वे अधिकृत नहीं हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस योजना में अधिकृत जवाबदेही किसकी है? जब अधिकारी ही जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं, तो फिर करोड़ों की योजना के क्रियान्वयन की हकीकत कौन बताएगा?

केंद्रीय राशि में फर्जीवाड़ा
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिरकार योजनाओं के नाम पर चल रहा यह खेल किसकी मिलीभगत से हो रहा है। केंद्रीय मद से जारी की गई राशि की कांग्रेस सरकार में किस तरह से बंदरबांट की जाती रही है, यह प्रधानमंत्री आदर्श एवं उत्कृष्ट ग्राम योजना में हुए फर्जीवाड़े से पता चलती है। जिसमें बिना कार्य किए ही राशि आहरण कर ली गई है। अब राज्य में सरकार बदल गई, किंतु अधिकारी भ्रष्टाचार से बाज नहीं आ रहे हैं। सुशासन सरकार के रहते भी बस्तर जिले में इस योजना के नाम पर सरकारी रकम हड़पने का खेल किया जा रहा है। इसी तरह केंद्रीय मद के 15वें वित्त की करोड़ों राशि के वारे न्यारे किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री का सपना चकनाचूर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को अधिकारी चकनाचूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। देश के हर घर, हर गली को सूर्य की ऊर्जा से रौशन करने का बेहतरीन सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देख रखा है। श्री मोदी के इस सपने को छत्तीसगढ़ में साकार करने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोई कमी नहीं कर रहे हैं। सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है, जिसे आम नागरिक हाथों हाथ ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बस्तर में पहले से लगी सोलर लाइटों की दुर्दशा विभाग की अकर्मण्यता का प्रदर्शन करती नजर आ रही है। यही वजह है कि बस्तर में सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को लेकर ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। अब देखना होगा कि बस्तर कलेक्टर हरिस एस. इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं?

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