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बोर और पंप के नाम पर किसानों से 6 लाख ऐंठ लिए कृषि अधिकारियों ने

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

4 साल बीतने के बाद भी न बोर हुआ, न पंप लगे 
 जिला खनिज न्यास निधि की राशि की बंदरबांट 
 काम हुआ नहीं, बना लिया कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र

जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा जिला खनिज निधि न्यास की राशि में बड़ा घोटाला किए जाने और किसानों के 6 लाख रुपए हड़प लेने का मामला सामने आया है। यहां दर्जन भर किसानों से उनके खेतों में बोर कराने और मोटर पंप लगाने के नाम पर कृषि अधिकारियों ने 6 लाख रुपए वसूल लिए, लेकिन 4 साल बीतने के बाद भी किसी भी किसान के खेत में न बोर कराया गया, न ही पंप बिठाया गया। गजब बात यह कि अधिकारियों ने कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र भी बनवा लिया है।
यह सनसनीखेज मामला सुकमा जिले के केरलापेंदा के गिरदापाल से सामने आया है। इस गांव के के एक दर्जन किसानों के खेतों में डीएमएफटी मद से नलकूप खनन एवं पंप लगाया जाना था। ताकि किसान फसल उगाकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी ने किसानों से पंप एवं नलकूप खनन के नाम पर लगभग 6 लाख से अधिक रुपए अंश राशि के रूप में वसूल लिए। मामले की शिकायत हाल ही में किसानों से कलेक्टर से की है। किसानों ने संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग करते हुए सिंचाई सुविधा बहाल करने की गुहार लगाई है। किसानों के साथ ऎसी ही धोखाधड़ी की शिकायतें कोंटा एवं छिंदगढ़ विकासखंड से भी सामने आई हैं। शिकायत तो जिला प्रमुख के पास पहुंच चुकी है लेकिन साहब जांच कब तक करा पाएंगे या फिर ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर योजना, मनरेगा मद में हुई अनियमितता की जांच की तरह शिकायत कहीं फाईलों में ही दफन न हो जाएं। विभाग ने बताया कि 17 किसानों को बिजली कनेक्शन दिया जाना था और 7 किसानों को सोलर लाईट लगानी थी जो अधूरा पड़ा हुआ है। कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार (एफआरए) वन अधिकार अधिनियम के तहत जिन किसानों को पट्टे प्रदान किए गए हैं, उन किसानों के कृषि कार्य को बढ़ावा देने एवं उनकी आर्थिक हालात सुधारने के दृष्टिकोण से कृषि विभाग द्वारा केरलापाल के 24 किसानों के खेतों में खनिज न्यास मद से वर्ष 2021-22 में नलकूप खनन एवं पंप लगाया जाना था। जिसके एवज में प्रत्येक किसान से 30 हजार अंश राशि वसूली की गई थी और प्रलोभन दिया गया था कि जल्द ही पंप अन्य सामाग्री उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन 3 वर्ष से अधिक समय निकल जाने के बाद भी किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी नसीब नहीं हो पाया है। किसानों की हालात तो नहीं सुधरी लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी के लिए उक्त राशि आय बढ़ाने का जरिया बन गई है। किसान चक्कर लगाते रहे इनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं। मामले का खुलासा आरटीआई से होने पर विभाग के अधिकारी किसानों तक दौड़ लगाकर मामले को रफा-दफा में जुटे हैं।

किसानों के खातों से वापस मंगाई राशि
विशेष सूत्रों से जानकारी मिली है कि जिन किसानों के खेतों में नलकूप खनन एवं पंप लगाया जाना था उन किसानों के खातों में 25-25 हजार राशि खाते में प्राप्त हुई थी। किसानों के खाते से प्राप्त राशि का आहरण करवाकर उप संचालक कृषि विभाग सुकमा द्वारा राशि को वापस मंगाया जा चुका है। कोंटा विकासखंड में 25 एवं छिंदगढ़ विकासखंड में 26 किसानों के साथ भी ऎसी ही धोखाधड़ी की जाने की खबर है। नलकूप खनन ही नहीं, बीज वितरण के नाम पर भी सुकमा जिले में बड़ा खेला किया गया है। इसमें भी बड़ी राशि की बंदरबांट का खेला हुआ है। जिन किसानों के नाम पर दलहन एवं तिलहन बीज वितरण करने की फाईल तैयार की गई है, उन किसानों को बीज नसीब ही नहीं हुआ है। सुकमा जिले में जिला खनिज न्यास निधि राशि का बड़े पैमाने पर पूर्व सरकार के मंत्री के इशारों पर बंदरबांट की गई है। कृषि विभाग ही नहीं पंचायतों में भी कागजी कार्य दर्शा कर करोड़ों की राशि हड़प ली गई है।जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 से 2023 तक सुकमा जिले में 2 अरब 86 करोड़ से अधिक राशि प्राप्त हुई थी, जो अफसरों की जेबों में समा गई। नलकूप खनन एवं पंप वितरण जिसका उदाहरण हैं।

शिकायत पर कलेक्टर खामोश
शोषण का शिकार हुए ग्रामीणों ने मामले की शिकायत 17 अप्रैल 2025 को कलेक्टर से की थी, लेकिन पांच माह से अधिक का वक्त निकल जाने के बाद भी किसानों को कोई राहत नहीं मिल पाई है। जबकि साप्ताहिक बैठकों में शिकायतों पर चर्चा की जाती है। लेकिन उन किसानों की शिकायतों पर साहब खामोश हैं। जिस प्रकार पंचायतों की जांच मामला फाईलों में बंद है उसी प्रकार किसानों की…

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