नई दिल्ली-
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की हालिया बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक अब EPF अकाउंट को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकेगा।
अब से कर्मचारियों को अपने PF खाते में कुल योगदान का कम से कम 25% हिस्सा बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह राशि रिटायरमेंट तक खाते में सुरक्षित रहेगी और इस पर नियमित ब्याज मिलता रहेगा। इस कदम का उद्देश्य कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
पूरा PF निकालने के लिए अब 2 नहीं, 12 महीने का इंतजार
पहले जहां सदस्य बेरोजगार होने के 2 महीने बाद पूरा PF निकाल सकते थे, वहीं अब यह अवधि 12 महीने कर दी गई है।
यानी नौकरी छूटने के बाद पूरा पैसा निकालने से पहले अब एक साल का इंतजार जरूरी होगा।
इसके अलावा, पेंशन (EPS) की पूरी निकासी के लिए अब 36 महीने की वेटिंग अवधि तय की गई है।
आंशिक निकासी के नियम बने आसान
EPFO ने कर्मचारियों को कुछ राहत भी दी है।
अब आंशिक निकासी के लिए मिनिमम सर्विस अवधि घटाकर 12 महीने कर दी गई है।
साथ ही पहले की 13 जटिल शर्तों को घटाकर सिर्फ 3 मुख्य कैटेगरी में बांटा गया है —
1. आवश्यक जरूरतें (शादी, शिक्षा, बीमारी)
2. आवास संबंधी जरूरतें
3. विशेष परिस्थितियां
खास बात यह है कि विशेष परिस्थितियों में अब कारण बताना जरूरी नहीं होगा, जिससे क्लेम रिजेक्शन के मामलों में कमी आएगी।
अन्य अहम फैसले
‘विश्वास योजना’ लागू: PF कॉन्ट्रीब्यूशन में देरी पर अब सिर्फ 1% प्रति माह पेनल्टी लगेगी।
EPS-95 पेंशनधारकों को अब घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सुविधा मिलेगी। इसकी ₹50 फीस EPFO खुद वहन करेगा।
EPF रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन सितंबर वेतन माह के लिए 22 अक्टूबर 2025 तक बढ़ा दी गई है, ताकि नियोक्ता नई ECR प्रणाली को अपना सकें।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं ये बदलाव?
अगर आप PF का पैसा जल्दी निकालने की सोचते हैं, तो अब आपको नया वित्तीय प्लान बनाना होगा।
हालांकि, जो कर्मचारी रिटायरमेंट तक निवेश बनाए रखना चाहते हैं, उनके लिए यह कदम लॉन्ग टर्म सेविंग के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकता है।
सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वह कर्मचारियों के भविष्य निधि को सुरक्षित और स्थायी निवेश के रूप में बनाए रखना चाहती है।









