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डाइट प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर में प्रशासनिक हठधर्मिता – कलेक्टर के आदेश को 21 दिन तक ठंडे बस्ते में डालना न्याय के साथ खुली खिलवाड़

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेंद्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा।
डाइट प्रशिक्षण सस्थान जांजगीर में एक बार फिर चर्चाओं में है — लेकिन इस बार कारण शिक्षा या प्रशिक्षण नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता, आदेशों की अवहेलना और एक ईमानदार अधिकारी के साथ होता अन्याय है।
21 सितंबर 2025 को कलेक्टर जांजगीर-चांपा ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि डाइट जांजगीर के प्रभारी प्राचार्य बी.पी. साहू को तत्काल प्रभार से मुक्त किया जाए, पीड़ित व्याख्याता सुरेश प्रसाद साहू का रुका हुआ वेतन जारी किया जाए, और दोषी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
लेकिन आज 13 अक्टूबर तक – 21 दिन बीत जाने के बाद भी आदेशों पर एक पत्ता तक नहीं हिला।
क्या यही है “संवेदनशील प्रशासन” की परिभाषा?
कलेक्टर के आदेशों की खुली अवहेलना — जिला प्रशासन मौन क्यों?
जिला प्रशासन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है —
क्या कलेक्टर के आदेश अब केवल “कागजों की औपचारिकता” बनकर रह गए हैं?
क्या जिले के अधीनस्थ अधिकारी इतने प्रभावशाली हो गए हैं कि वे कलेक्टर के निर्देशों को भी ठुकरा सकते हैं?
क्या शासन-प्रशासन ने न्याय की जगह “राजनीतिक सुविधा” को प्राथमिकता दे दी है?
यह न केवल प्रशासनिक शिथिलता का उदाहरण है, बल्कि यह शासन की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।
पीड़ित व्याख्याता का दर्द – आदेश मिला, न्याय नहीं
पीड़ित व्याख्याता सुरेश प्रसाद साहू ने कहा —
> “मैंने शासन और प्रशासन पर विश्वास करते हुए शिकायत की थी। जांच में सच्चाई सामने आई, लेकिन अब वही प्रभारी प्राचार्य मुझे नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। छुट्टियां अस्वीकार की जा रही हैं, और मुझे दबाव में काम करने पर मजबूर किया जा रहा है।”
क्या यह किसी लोकतांत्रिक शासन की तस्वीर है, या फिर यह किसी “प्रशासनिक अत्याचार” का प्रतीक?
जनदर्शन भी बन रहा ‘जन-उपेक्षा मंच’
जनदर्शन का उद्देश्य था कि आम नागरिकों और कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो।
परंतु जब कलेक्टर स्तर के आदेश ही 21 दिन में लागू न हों, तो जनदर्शन की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
आज (13 अक्टूबर) को पीड़ित सुरेश प्रसाद साहू ने जिला कलेक्टर को आवेदन देकर “तत्काल कार्यवाही” की मांग किया गया है
उन्होंने कहा —
> “मुझे न्याय चाहिए, उत्पीड़न नहीं। मैंने शासन पर भरोसा किया था, अब वही भरोसा टूटने लगा है।”
शासन-प्रशासन के खिलाफ बढ़ता आक्रोश
यह मामला अब सिर्फ एक व्याख्याता का नहीं रहा —
यह प्रशासनिक जवाबदेही, शासन की साख और न्यायिक संवेदनशीलता का सवाल बन चुका है।
अगर शासन इस तरह के मामलों में विलंब करता रहेगा, तो ईमानदार कर्मचारी हतोत्साहित होंगे और भ्रष्ट तथा दबंग अधिकारी और भी बेलगाम हो जाएंगे।
जनता अब पूछ रही है —
> “जब कलेक्टर के आदेश लागू नहीं हो रहे, तो आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा?”
“क्या अब कलेक्टर कार्यालय में आवदेन केवल औपचारिकता बन गया है?”
“क्या शासन का मौन भ्रष्टाचारियों की ढाल बन चुका है?”
हमारा स्पष्ट और दृढ़ मत है —
राज्य शासन को तत्काल प्रभाव से
डाइट प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर के प्रभारी प्राचार्य बी.पी. साहू को पद से मुक्त किया जाए,
पीड़ित व्याख्याता सुरेश प्रसाद साहू को न्याय प्रदान किया जाए,
और जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर जिम्मेदारी तय की जाए।
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह न केवल एक अधिकारी के साथ अन्याय होगा, बल्कि यह शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनता के विश्वास को भी तोड़ देगा।
यह संघर्ष अब न्याय का प्रतीक बन चुका है
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की परख है जो “सत्य, न्याय और संवेदना” के सिद्धांत पर टिकी है।
अगर शासन अब भी नहीं जागा, तो जांजगीर-चांपा ही नहीं, पूरे प्रदेश में यह आवाज उठेगी —
> “न्याय दो सुरेश साहू को, जवाब दो शासन-प्रशासन को!”
 जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार सिन्हा 4  बार फोन किया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ अब अंदाजा लगाया जा सकता कि किस प्रकार शिक्षा विभाग जांजगीर चांपा को संभालेंगे
 कलेक्टर  जन्मेजय महोबे जिला जांजगीर चांपा जी कहना कि  आवेदनकर्ता के जुलाई एवं अगस्त का वेतन  भुगतान करने डीईओ को निर्देश दिया हूं और बी, पी, साहू प्रभारी प्राचार्य (डायट)को हटाने के लिए उचित कार्यवाही के लिए राज्य सरकार शिक्षा सचिव को अनुशंसा पत्र कार्यवाही के लिए भेजा गया है
शिक्षा सचिव रायपुर का कहना है कि जिला जांजगीर चांपा कलेक्टर कार्यालय से मुझे 28/9/2025 को पत्र प्राप्त हुआ जिसमें बी , पी, साहू प्रभारी प्राचार्य, के विरुद्ध कार्यवाही के लिया  अनुशंसा किया गया वह प्राप्त हो  गया जल्द ही कार्यवाही किया जाएगा

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