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बन रहा है ग्रहों का शुभ संयोग, जानिए दिवाली पूजन का शुभ समय

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रतनपुर संवाददाता – रवि परिहार

हिंदू सनातन धर्म का दीपावली पर्व प्रतिपदा मुक्त आमावस्या तिथि में मनाया जाएगा। कार्तिक मास में दीपोत्सव के रूप में पांच दिन के पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें धन्वंतरि पूजन, यम पूजन, हनुमत पूजन, पितृ पूजन, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजन, श्री कृष्णा (अन्नकूट पूजन), भैया दूज, चित्रगुप्त लेखनी पूजा विधि विधान से की जाती है। इस साल श्री शुभ संवत् 2082 शाके 1947 कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 दिन सोमवार को बड़े ही धूमधाम के साथ विश्वभर में मनायी जाएगी। अमावश्या तिथि 20 अक्टूबर दिन सोमवार को दिन में 2:32 से आरंभ होकर अगले दिन अर्थात 21 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार को दिन में 4:25 बजे तक व्याप्त है। इस प्रकार अमावस्या की सम्पूर्ण रात 20 अक्टूबर को ही मिल रहा है । 20 अक्टूबर दिन सोमवार को ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है। इस प्रकार प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी, भगवान गणेश एवं कुबेर आदि सहित दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है तथा प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है।

किन लोगों से रूठ जाती हैं मां लक्ष्मी

कुचेलिनं दन्तमलप्रधारिणं बह्वाशिनं निष्ठुरवाक्यभाषिणस्‌ । सूर्योदयं चास्तमिते च शायिनं विमुञ्चति श्रीरपि चक्रपाणिनम्‌।।
त्याग जो मनुष्य मेले वस्त्र पहनते हैं, जो दांत नहीं मांजते हैं, जिनके दांत गंदे रहते हैं, जो दूसरों से कड़वे शब्द बोलते हैं। जिनकी वाणी खराब होती है। जो मनुष्य बहुत भोजन करता है, और सूर्योदय होने के समय अथवा अस्त होने के समय सोते हैं। ऐसे लोगों के यहां लक्ष्मी जी नहीं आती हैं।

दीपावली के दिन ग्रहों का भी बहुत ही सुंदर योग 

इस वर्ष दीपावली के दिन ग्रहों का भी बहुत ही सुंदर योग बन रहा है। जहां इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में शुक्र के साथ विद्यमान होगा। वहीं पर बुध शुक्र की राशि तुला में विद्यमान रहकर बुधादित्य एवं राशि परिवर्तन राजयोग का निर्माण करेगा। मंगल शुक्र की राशि तुला में सूर्य के साथ भौमादित्य नामक योग का निर्माण करके विद्यमान होगा। गुरु अमावस्या कोअपनी उच्च राशि कर्क में रहेंगे। शनि, देव गुरु बृहस्पति की राशि मीन में, केतु सिंह राशि में तथा राहु कुंभ राशि में गोचर करेगा। कार्तिक मास की जिस तिथि अर्थात जिस अमावस्या तिथि में प्रदोष काल, निशीथ काल तथा महा निशीथ काल मिल रहा हो, वही अमावस्या तिथि दीपावली की पूजन के लिए श्रेष्ठ मानी जाएगी। इस प्रकार 20 अक्टूबर दिन सोमवार को प्रदोष काल काल, निशीथ काल, तथा महा निशीथ काल का शुभ संयोग निर्विवाद रूप से मिल रहा है। धर्म शास्त्रो के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्त्व पूर्ण होता है। दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते है, जहाँ दिन विष्णु स्वरुप है वहीँ रात माता लक्ष्मी स्वरुपा है, दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है ।

प्रदोष काल का महत्त्व 

प्रदोष काल का महत्त्व गृहस्थो एवं व्यापारीक कार्यो हेतु महत्त्वपूर्ण होता है तथा महानिशीथ काल तान्त्रिकों कार्यो एवं क्रियाओ के लिए उपयुक्त होता है । प्रत्येक वर्ष अमावश्या व्यापिनी महानिशिथ काल में तंत्र साधना हेतु महत्वपूर्ण होता है। महानिशीथ काल अर्थात महानिशा काल मध्यरात्रि में स्थिर लग्न सिंह 1:19 से 3:33 बजे के मध्य है। निशा पूजा, काली पूजा, तांत्रिक पूजा के लिए शुभ चौघड़िया के साथ मध्य रात में 1:35 से बजे से 3:33 बजे तक है। जो अति महत्त्वपूर्ण, अति शुभ एवं कल्याण कारक मुहुर्त्त है।

दीपावली 20 अक्टूबर दिन सोमवार को स्थिर लग्न :-

(1) 20 अक्टूबर दिन सोमवार को स्थिर लग्न कुंभ दिन में 2:13 से लेकर के 3:44 बजे के बीच में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए पूजन किया जा सकता है। शुभ चौघड़िया चर एवं लाभ इस समय प्राप्त हो रही है।
(2)- 20 अक्टूबर दिन सोमवार को स्थिर लग्न वृष रात में 06:51 से 8:48 बजे तक । जो अति श्रेष्ठ है एवं प्रदोष काल से युक्त है। साथ ही सायं 5:30 बजे से 6:10 बजे तक शुभ चौघड़िया भी है। अतः दीप प्रज्वलित करने का श्रेष्ठ मुहुर्त्त।
(3)- 20 अक्टूबर दिन सोमवार को स्थिर लग्न सिंह मध्य रात्रि बाद 1:19 से 3:33 बजे रात तक एवं शुभ चौघड़िया के साथ 1:35 से 3:10 बजे तक ।
दीपावली पूजन हेतु 20 अक्टूबर दिन सोमवार को शुभ चौघड़िया समय :-
(1) दोपहर 2:32 बजे से सायं 5:40बजे तक चर, लाभ एवं अमृत चौघड़िया।
(2) रात में 5:40 से 7:15 बजे तक चर
(3)रात में 10:25 से 12:00 बजे तक लाभ
(4) रात में 1:35 से भोर 4:45 बजे तक शुभ व चर चौघड़िया
धनतरेस पर रोज सुबह शाम मां लक्ष्मी जी की आरती🌷🌷 ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। पढ़नी चाहिए। वैसे तो दीपोत्सव के छह दिनों के इस पर्व में रोज सुबह शाम मां लक्ष्मी की आरती से लाभ मिलता है। लेकिन इस दिन खास तौर पर मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।

श्री लक्ष्मी माता की आरती 

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता॥
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दोहा
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय
पंडित रमेश शर्मा मंगलागौरी धाम पोंडी रतनपुर

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